ऋग्वेद कविताएं भारतीय साहित्य की आत्मा है

प्रसिद्ध साहित्यकार शिक्षाविद डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला के काव्य संग्रह ऋग्वेद की कविताएं तृतीय खंड का विमोचन सम्पन्न

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री विभाष उपाध्याय

रतलाम । आदिकाल से लेकर वर्तमान समय तक भारतीय वेद तथा साहित्य की गंगोत्री को जो प्रवाह निरंतर मिला है उसमें ऋग्वेद में रचित कविताओं का अपूर्व योगदान रहा है हमारी आध्यात्मिक संस्कृति और विरासत को सवारने का जो कार्य ऋग्वेद की कविताओं में वर्णित है वह अप्रतिम है पूरे विश्व के लिए एक श्रेष्ठतम भव्य स्मारक की तरह है जिस से आने वाली पीढिय़ां कई सदियों तक प्रेरणा प्राप्त कर सकती है। उक्त उद्गार बरबड़ रोड़ स्थित ओरो आश्रम द्वारा आयोजित प्रसिद्ध साहित्यकार शिक्षाविद डॉक्टर मुरलीधर चांदनी वाला के काव्य संग्रह ऋग्वेद की कविताएं तृतीय खंड के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में पधारे भारतीय जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री विभाष उपाध्याय ने व्यक्त किए । आपने कहा कि ऋग्वेद में गार्लिक वेद और शास्त्रों के गहन अध्ययन का रुपांतरण करना सहज सरल नहीं यह कठिन तपस्या के समान ने जो आदरणीय डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला जैसे संस्कृत व हिंदी के विद्वान साहित्यकार ही कर सकते हैं । ऋग्वेद से संबंधित यह पुस्तक वर्तमान समय के साहित्यकारों के लिए पवित्र ग्रंथ के समान है जिसके महत्व को हम सब को समझना होगा ।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर में उपस्थित प्रसिद्ध रंगकर्मी कैलाश व्यास ने कहा कि महान विभूतियों के पृथ्वी पर अवतरण भगवान शिव की कठिन तपस्या ओके प्रतिफल में होते हैं चाहे वह आदि शंकराचार्य हो या फिर स्वामी विवेकानंद हो या फिर डॉ. चांदनी वाला ही क्यों ना हो प्रभु नित्यानंद जी के आशीर्वाद से उनका जीवन और लेखनी संपूर्ण समाज को आलोकित कर रही है उनकी काव्य साधना साहित्य साधना हम सब के लिए अत्यंत उपयोगी और सार्थक है । डॉ. चाँदनी वाला संस्कृत जैसी कठिन भाषा में निपुणता प्राप्त कर हिंदी को अपने कर्मों भाषा बनाया यह उनके विद्वान विचारों का श्रेष्ठतम प्रतिफल है ।
शिक्षक सांस्कृतिक संगठन के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि डॉक्टर चांदनी वाला ने साहित्य और अपने लेखन के माध्यम से नई पीढ़ी को सर्जनात्मक प्रेरणा प्रदान की है युवा साहित्यकार लेखक और कवि उन्हें अपना आदर्श मानते हैं ऋग्वेद की कविताओं का हिंदी में अनुवाद करना और जनमानस तक वेद साहित्य को पहुंचाना यह किसी पवित्र पुण्य स्नान के समान है हम सब आदरणीय सर के आभारी हैं कि वह निरंतर साहित्य साधना से समाज के सर्जनशील व्यक्तियों को एकजुटता का पाठ पढ़ाते हुए निरंतर सक्रिय रहने की प्रेरणा प्रदान करते हैं ।
आरंभ में डॉक्टर चांदनी वाला ने अपने उद्बोधन में अतिथियों का स्वागत करते हुए अपनी नवीन पुस्तक ऋग्वेद के तृतीय खंड के सूत्रों का अनुवाद तथा आवरण चित्र ऋषि विश्वामित्र नदी संवाद को उद्धृत करते हुए कहा कि ऋग्वेद में नदियों और ऋषि परंपरा का जो संवाद वर्णित हुआ है उसे आम जन तक पहुंचाना ही पुस्तक का मूल उद्देश्य है हरि शिव की तपस्या नदियों का उद्गम किसी विशेष प्रयोजन से ही निहित होता है नदियां अनवरत बहती है अपने साथ जीवन संवारने का संदेश देती है उन्हें रोकना संभव नहीं है और ऋषि यों से प्रदत्त ज्ञान हमारे शास्त्रों के माध्यम से आज भी प्रासंगिक और अतुलनीय पूजनीय है हमें इन परंपराओं तथा मूल्यों का सम्मान करना होगा ।
डॉ.चांदनीवाला ने कहा कि वेद और ऋग्वेद की कविताओं को जन-जन तक पहुंचाना इस पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य रहा वर्णित सूत्रों को शब्दों का आवरण देना अत्यंत दुर्लभ कठिन कार्य है मां सरस्वती की कृपा से मैं उनका अनुवाद करने में सफल हुआ हूं विदित हो कि डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला विगत कई वर्षों से साहित्य साधना के माध्यम से भारतीय वेदों और शास्त्रों के बारे में अपने वैचारिक लेखन तथा पुस्तकों के माध्यम से इस कार्य को संपादित कर रहे हैं यहां उनकी श्रेष्ठ साहित्य साधनाओं की नवीनतम रचना है जो आम जनमानस तक पहुंची है पुस्तक में वर्णित सूत्र हमारी वैदिक परंपराओं का गुणगान करती हुई मानवी य मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं ।
आरंभ में अतिथियों ने महर्षि अरविंद चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तत्पश्चात विनीता ओझा ने प्रार्थना प्रस्तुत की । अतिथियों का स्वागत करते हुए ऋतम उपाध्याय ने अतिथियों का परिचय प्रदान किया । आपने ऋग्वेद कविताओं के अंक के बारे में प्रकाश डालते हुए वेद सूत्रों और कविता की महत्ता को प्रतिपादित किया। सर्वश्री अमित श्रीवास्तव, किशोर पाठक, प्रतिभा चांदनी वाला ने अतिथियों का स्वागत किया । इस अवसर पर श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर, नरेंद्र सिंह पंवार, राधेश्याम तोगड़े, श्याम सुंदर भाटी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ऋतम उपाध्याय तथा आभार प्रकाश गंगराड़े ने व्यक्त किया ।