अरमान और सपने उतने देखो जिसमें स्वाभिमान को गिरवी ना रखना पड़ेगा – आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी

सम्मेदशिखर जी । उक्त उवाच परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी ने मौन वाणी से मुनि शती 108 पीयूष सागर जी ने अपनी जुवानी बताया कि अरमान और सपने उतने देखो जिसमें स्वाभिमान को गिरवी ना रखना पड़ेगा । संसार में केवल एक ही चीज है जो हमारे अरमान और सपनों को पूरा नहीं होने देती है असफलता का भय सपने देखने के लिए सोना पड़ता है और सपने को पूरा करने के लिए जागना पड़ता है ।
सपने संजोए लेकिन उनको पूरा करने के लिए संकल्प,समर्पण, और श्रम बहुत जरूरी है। संकल्प लो ,सपने देखो, असफलता के भय को दूर रख कर उन्हें पूरा करने में लग जाओ ।जो लोग अपनी असफलता के लिए दूसरों को दोषी ठहराते हैं या समय का बहाना बनाते हैं वह स्वयं को दूसरे को धोखा दे रहे हैं ।इसलिए कर लो दृढ़ संकल्प…देवता चरण पखारेंगे । कुछ कार्य सुनने में बहुत अच्छे लगते हैं जिन्होंने पूरा करो छठी का दूध याद आता है सम्मेदशिखर पर्वत की वंदना की बातें करना सरल है लेकिन जब वंदना के लिए जाओ तो तारे जमीन पर नज़र आ जाते है।इसलिए सफलताओ के शिखर के लिए असफलता का डर हटाये ओर हिम्मत से एक कदम आगे बढ़ाए। आज 14 फरवरी को तीर्थराज सम्मेदशिखर जी मे 26 वा पारणा होगा इनके पारणा के लिए भक्त लोग पधार रहे है।