23 फ़रवरी से गुरु अस्त 15 मार्च से मीन संक्रांति होने से देवप्रतिष्ठा आदि मांगलिक कार्यों पर 14 अप्रैल तक लगेगा विराम

पं.संजयशिवशंकर दवे, ( ज्योतिषाचार्य ) रतलाम, Mob. 9301219485

प्रत्येक मांगलिक कार्य में गुरु बल की प्राथमिकता को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है , गुरु के अस्त होने पर किसी भी प्रकार क़े मांगलिक कार्य नहीं किए जाते ,गुरु का अस्त होना ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। … गुरु और शुक्र दोनों ही ग्रहो के बल शुभ कार्यो क़े निर्विघ्ता से सम्पन्न तथा सुख-संपन्नता और मांगलिक कार्यों मे वैभव सम्पन्नता प्रदान कराते हैं ।
ज्योतिषाचार्य पं.संजयशिवशंकर दवे ने बतलाया क़ी फाल्गुन कृष्ण सप्तमी बुधवार 23 फरवरी को सायं 7 बजे गुरु पश्चिम में अस्त हो रहे हैं जो आगामी एक माह उपरान्त चैत्र कृष्ण षष्ठी बुधवार 23 मार्च को प्रात: 6.41 बजे पूर्व दिशा में उदय होंगे ।
गुरु अस्त होने की स्थिति में 23 फरवरी से 23 मार्च के मध्य किसी भी प्रकार की देवप्रतिष्ठा मुहूर्त विवाह आदि मांगलिक कार्य सर्वथा निषिद्ध हैं ।
इस बार 23 मार्च को गुरु के उदित होने के पूर्व ही फाल्गुन शुक्ल एकादशी 14 व 15 मार्च की मध्य रात्रि को 12:15 पर सूर्यदेव मीन राशि मे प्रवेश करेंगे इस अन्य मलमास के आरंभ होने से चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 14 अप्रैल तक मीन राशि के अंतर्गत सूर्य अन्य मलमास रहने से इस मध्य भी देवप्रतिष्ठा विवाहआदि मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित रहेगे।
आगामी देव प्रतिष्ठा मुहूर्त
9 , 10 , 16 ,17 , 23 – अप्रैल
4 , 6 , 7 , 8 ,12 ,13 , 14 , 20 , 26 , 27 – मई
1 , 4 , 8 , 10 , 11 , 19 – जून
पं.दवे ने बतलाया क़ी उपरोक्त सर्वदेव प्रतिष्ठा मुहूर्त 25 अप्रैल से आरंभ हो रहे हैं उसके पूर्व किसी भी प्रकार की देवप्रतिष्ठा करना नियमानुसार सर्वथा निषिद्ध रहेंगा।
गुरु के अस्त होने की स्थिति साथ मीन संक्रांति ( अन्य मलमास ) के अंतर्गत साधकों को यथाशक्ति सामर्थ्य अनुसार दान पूजन जप करना चाहिए व इस मध्य श्री रामचरितमानस श्रीमदभगवतगीता व पुराणों क़ा नियमित रूप से स्वाध्याय करने से मन निर्मल होता है तथा नवग्रह जन्य समस्त बाधाएं दोष समाप्त होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है ।

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