साधारण और विशेष, व्यक्ति एवं उनका व्यक्तित्व

आज के दौर में विशेष व्यक्ति होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। विशेष व्यक्ति होना बहुत अच्छी बात है बस उनके गुण विशेष व्यक्तित्व वाले होना ही चाहिए।परंतु जिनके गुण विशेष व्यक्तित्व वाले नहीं है ऐसे विशेष व्यक्ति चाहे जो करें वह फिर भी सब मान्य हो जाता है। वह पब्लिकली सरासर झूठ भी बदल जाता है तो उसका प्रतिकार नहीं हो पाता वह कभी-कभी कोई गैरकानूनी काम भी कर जाता है तो कानून उस पर कार्रवाई करने में बहुत विचार करने लगता है।
लेकिन एक साधारण व्यक्ति उसकी कोई बखत नहीं होती चाहे उसमें विशेषता हो या ना हो। क्योंकि अधिकतर व्यक्ति आर्थिक स्थिति के आधार पर साधारण और विशेषता का दर्जा पाता है।
कई ऐसे साधारण व्यक्ति हैं जिनका बहुत ही असाधारण व्यक्तित्व होता है। लेकिन दुनिया उसे पहचानने में बहुत समय लगा देती है। और शायद कभी-कभी तो उसे पहचान ही नहीं पाते।
व्यक्ति के गुणों की परखो उसकी आर्थिक स्थिति से नहीं बल्कि उसके उच्च व्यवहार एवं व्यक्तित्व से परखिये। उसकी आदर्शता, उसका देश प्रेम, उसकी समाज परिवार के प्रति सद्भावना का गुणगान होना चाहिए।
समाज में आवश्यकता है व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसके बलशाली या सत्ताधारी होने के बजाय उसके गुणों और व्यक्तित्व के आधार पर उसे सामाजिक तौर पर राजनीतिक तौर पर स्थान देना चाहिए तब एक नए युग की स्थापना होगी।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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