तेरी शरण में आकर में धन्य हो गया – योग ऋषि स्वामी रामदेव

रतलाम। स्वर्ण धर्म नगरी रतलाम मां कालिका माता व मांगल्य मंदिर के दिव्य दर्शन वंदन आशीर्वाद प्रसाद पाकर आत्मिक शांति सुकुन की अनुभूति पतंजलि योगपीठ हरिद्वार युवा भारत केन्द्रीय प्रभारी आदरणीय भ्राताश्री सचिन जी ने कहा में नहीं जगत जननी मां ने मुझे बुलाया है संपूर्ण भारत विश्व में संचालित योग कक्षाओं योद्धाओं समितियों के निरोगी काया कल्प सुखमय जीवन की मंगल कामना करते हुए पूज्य स्वामी जी महाराज की सुक्ष्म उपस्थित को नमन करते हुए अपने योग क्रांति यात्रा को वृहद स्वरूप प्रदान करने के विचार व्यक्त कर योग आयुर्वेद वैदिक शिक्षा पद्धति आचार्य गुरुकुलम स्वदेशी से देश की समृद्धि की और अग्रसर हर भारतीय नागरिक हों योगमय यज्ञमय भक्तिमय स्वच्छ स्वस्थ समृद्ध हरा-भरा हों स्वराज हमारा संकल्प लिए जन-जन हर घर-परिवार आंगन भारतीय नागरिक भारत को विश्व गुरु बनाएं यह योग जन संदेश विशेष तौर पर पतंजलि युवा राज्य प्रभारी म.प्र.पश्चिम प्रेमाराम पुनिया जी ने दिया।
जेवीएल मांग्लय मंदिर युवा सेवा संघ प्रमुख सुदामा जी मिश्रा भाई महावीर जी समिति साधक बंधुओं द्वारा हरिद्वार से आएं केन्द्रीय प्रभारी जी को संपूर्ण भ्रमण करवाया वो जानकारी से अवगत कराया ज्योतिषाचार्य पतंजलि युवा भारत जिला यज्ञ प्रभारी पं संजय शिवशंकर दवे जी द्वारा पूजा अर्चना कर मंत्रोच्चारण की हुई दिव्य रुद्राक्ष माला से सम्मानित किया आमजन मानस में प्रकृति अध्यात्म शारीरिक मानसिक आत्मिक बल वृद्धि के लिए मंत्रोच्चार से सिद्ध की गई निःशुल्क 40 हजार रुद्राक्ष महाप्रसादी वितरण की जानकारी सुन केन्द्रीय प्रभारी ज़िले में किए जा रहे नि:स्वार्थ मानव परमार्थ सेवा कार्य से प्रभावित हुए ।
युवा वह हैं जिसमें सदैव समाज को संगठित करने के लिए कुछ अच्छा कर गुजरने की मंशा लक्ष्य हों इसमें उम्र का कोई बंधन नहीं वर्तमान समय में सोशल मीडिया अन्य रचनात्मक तरीकों से स्कूल कालेजों इन्स्टीट्यूट सामाजिक धार्मिक राजनैतिक संगठनों अन्य संस्थानों युवाओं में योग की क्रांति आए अंतराष्ट्रीय योग दिवस विश्व गुरु की और अग्रसर करेगा उसी उद्देश्य से पतंजलि अष्टांग योग करवाया गया वहीं रतलाम जिले के युवा भारत जिला प्रभारी विशाल कुमार वर्मा महामंत्री नितेंद्र आचार्य द्वारा योग समाजसेवा प्रकृति पर्यावरण भूमि जल संरक्षण संवर्धन मानव जीव परमार्थ सेवा कार्य से प्रभावित होकर ऐसे प्रेरणास्रोत युवा साथियों की देश को जरूरत हैं ऐसे युवा सेवाभावी हीं हर कठिनाइयों परिस्थितियों का सामना कर सहजता सरलता लिए बिना संसाधनों के मिशाल कायम करते हैं पद से कहीं ज्यादा प्रतिष्ठित और हर पथ पर अग्रसर होते हैं यही राष्ट्र धर्म है।