लक्ष्य पूर्ति के लिए अपनाया गया सा धन भी शुद्ध पवित्र होना चाहिए- राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

भीलवाड़ा शास्त्री नगर अहिंसा भवन 31 मार्च 2022 । यश कामना पद और प्रतिष्ठा की लालसा से किया गया धर्म कार्य भी आत्म कल्याण में बाधक बन सकता है उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश से संबोधित करते कहा कि लक्ष्य पूर्ति के लिए अपनाया गया सा धन भी शुद्ध पवित्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्काम और निस्वार्थ भावना से किया गया कार्य आत्मा उत्थान में सहयोगी बनता है । मुनि कमलेश ने बताया कि गरीब अमीर ऊंच-नीच जाति और पंथ की संकीर्ण दीवारों से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति समान भाव से व्यवहार करना ही धार्मिकता का मुख्य लक्ष्य चाहिए।
राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि जितनी अपेक्षा रखेंगे हमें उतना ही उपेक्षा की पीड़ा का शिकार होना पड़ेगा । जैन संत ने कहा कि मान अपमान हानि और लाभ की परवाह नहीं कर कदम पीछे नहीं हटता है वहीं विश्व पूजनीय बनता है गौतम मुनि जी ने विचार व्यक्त किए।