जावरा (अभय सुराणा) । पुर्व बीमा अभीकर्ता व समाजीक कार्यकर्ता सुजामल कोचट्टा ने जीवन बीमा कराने वाले लोगों सेअपील की है कि कैन्द्र सरकार बीमा व्यवसाय पर जब तक जीएसटी व सिएसटी खत्म नही करे तब तक लोग बीमा व्यवसाय का बहिष्कार करे।
श्री कोचट्टा ने बताया कि 2014 के पहले बीमा कराने वालो से कोई भी अतिरिक्त शुल्क ,टेक्स या जीएसटी व सिएसटी आदि कर नही लिये जाते थे किन्तु महगाई कम करने व गरीबी दूर करने का नारा देकर सरकार बनाने के बाद देश की वित्तमंत्री श्रीमती सीतारमण ने छोटी छोटी राशि से बचत कर अपने भविष्य के लिये बीमा कराने वाले गरीबों को भी नही छोडा उनकी बचत राशी पर भी 2 से 5 प्रतशत जीएसटी व सिएसटी कर लगा कर उनके साथ विश्वासधात कीया
श्री कोचट्टा ने कहा कि एक तो जनता भारतिय जीवन बीमा निगम अरबो खरबो रूपये का बीमा कराकर सरकार को विभिन्न योजनाओं मे वापरने के लिये भरपुर राशी उपलब्ध कराती है उल्टे अब सरकार उनसे जीएसटी व सिएसटी लेकर दुध देती गाय को ही मार डाला।
श्री कोचट्टा ने बताया कि सरकार के रोजगार के भरोसे न बेठकर देशभर मे शहर व् विशेषकर ग्रामीण क्षैत्रों के करोडो युवा बीमा एजेंट बनकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे है किन्तु जीएसटी व सिएसटी के कारण बीमा कराने से अब लोग कतराने लगे है लोगो का कहना है कि हम बीमा करा रहे है कोई व्यवसाय नही कर रहे है फिर टेक्स किस बात का । फिर बीमा लग भग 20=25 साल के टर्न का होता है हर साल हमको किश्त भरना है हर किश्त पर जीएसटी व सिएसटी देना पडेगी तो बीमा कराना ही बेकार है । सरकार का यह जजीया कर है जो हमे मंजूर नही।
श्री कोचट्टा ने मांग कि कि जी्वन बीमा प्रिमियम पर से यह जजीया टेक्स अविलम्ब हटाया जावे वरना नागरिक बीमा व्यवसाय का पुरी तरह बहिष्कार करेगे जिससे देश मे सबसे ज्यादा राशि सरकारी योजनाओं मे देने वाली भारतीय जीवन बीमा कम्पनी बन्द हो जावेगी। करोडो युवा भी बरोजगार हो जावगे।वैसे जनचर्चा यह भी है कि सरकार खुद भारतीय जीवन बीमा निगम को बेचने जा रही है तो बीमा निवैशक क्यो इस डुबती कम्पनी मे अपना धन निवेश करेगे। और वह भी जीएसटी व सिएसटी टेक्स के साथ नही सरकार को तुरन्त जीवन बीमा प्रिमियम पर से यह टेकस खत्म कर देना चाहिए।