06 मई से 16 मई तक हर रोज किसी की जयंती या व्रत वाले दिन है : ज्योतिषाचार्य एस.सी. जैन

वैशाख शुक्ल पक्ष में हर दिन कोई जयंती का त्यौहार रहता है

ग्वालियर । विख्यात ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद जैन ने जानकारी देते हुए बतायाकि 8 मई को श्री गंगा जयंती 9 मई श्री बगुलामुखी जयंती, दुर्गाष्टमी, 10 मई को श्री सीता नवमी (जयंती) थी । आज 12 मई मोहिनी एकादशी, 13 मई को प्रदोष व्रत, 14 श्री नृसिंह जयंती, 15 मई को श्री छिन्नमस्ता जयंती, श्री कुर्म जयंती, 16 मई तो बुद्ध पूर्णिमा (जयंती) ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने जानकारी में बताया कि आज 12 मई मोहिनी एकादशी : वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है इस बार मोहिनी एकादशी का व्रत आज 12 मई गुरूवार को है । यह व्रह मोह बंधन तथा पापों से मुक्ति दिलाता है । सीता माता की खोज के दौरान भगवान राम ने तथा महाभारत काल में युधिष्ठिर ने मोहिनी एकादशी व्रत कर अपने सभी दुखों से छुटकारा पाया था ।
श्री नृसिंह जंयती : इस बार यह व्रत 14 मई शनिवार को है । नरसिंह चतुर्दशी का व्रत सभी परेशानियां दूर करता है और इस व्रत से भगवान की कृपाबनी रहती है। नरसिंह अवतार में भगवान ने आधा आदमी और आधा शेर का रूप धर लिया था। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते है । नरंिसंह चतुदर्शी के दिन भगवान नरसिंह के साथ लक्ष्मीमाता की भी पूजा करनी चाहिए । इससे लक्ष्मी जी कृपाबनी रहती है।
बुद्ध पूर्णिमा : बुद्ध पूर्णिमा वैशाख कृष्णपक्ष पूर्णिमा 16 मई सोमवार को मनाई जाएगी । भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व या संबोधि) और महापरिनिर्वाण से तीनों वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे । इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति भी हुई थी। आज बौद्ध धर्म को मानने वाले विश्व में बहुत से लोग है जो बड़ी धुमधाम से बुद्ध जंयती मनाते है । यह त्यौहार भारत, चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाईलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यामांर, इंडोने$िशया, पाकिस्तान तथा विश्व के कई देशों में बहुतायत मनाया जाता है।
बिहा स्थित बौधगया नामक स्थान हिन्दू व बौद्ध धर्मावलंबियों के पवित्र तीर्थ स्थान है । गृह त्याग के पश्चात सिद्धार्थ सत्य की खोज के लिए सात वर्षो तक वन में भटकते रहे। यहां उन्होंने कठोर तप किया और अंतत: वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बौधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति होती है । तभी से यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में माना जाता है । बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध की महापरिनिर्वास्थली कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण बिहार पर एक माह का मेला लगता है । बिहार में भगवान बुद्ध की लेटी हुई (स्पर्श मुद्रा) 6.1 मीटर लंबी मूर्ति है । जो लाल बलुई मिट्टी की बनी है । यह विहार उसी स्थान पर बनाया गया है जहां से यह मुर्ति निकाली गई थी । विहार के पूर्व हिस्से में एक स्तूप है । यहां पर भगवान बुद्ध का अंतिम संस्कार किया गया था। यह मूर्ति भी अजंता में बनी भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण मूर्ति की प्रतिकृति है।

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