
सम्मेदशिखर जी । अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी ने हम सभी लोगों को मौन स्वर में मुखर आशीर्वाद तीर्थराज सम्मेदशिखर जी के पारसनाथ टोंक से दिया।
णमो लोए सव्व सिद्धाणं
प्रिय आत्मन — अनन्त प्रेम।
शुभाशीर्वाद स्वस्थ और प्रसन्न रहो।
जिनकी बदौलत से हमें दौलत मिल रही है, हमारा घर, परिवार, समाज, फल फूल रहा है। आज जो परमात्मा 41 महिनों से बिना अभिषेक, पूजा, पाठ, विधान के ताले में बन्द होकर बैठे थे परन्तु आज मन अति प्रसन्न हो रहा है कि मेरी कठिन तप साधना
के 300 दिन पूर्ण हुये और आप लोगों ने परमात्मा को बन्धन से मुक्त करके सभी भक्तों को दर्शन पूजा, भक्ति, आरती, अर्घ्य अर्पण करने का अवसर दिया।
इस व्रत-तप-साधना में हमने बहुत कुछ जाना, समझा और वो पाया जिसकी हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे। आपने हमारी भावनाओं को अपनी भावना समझकर जो कार्य किया है वह स्तुत्य है, अनुकरणीय और प्रशंसनीय है। आप अपनी मांगे जारी रखें लेकिन भगवान की अभिषेक पूजा भक्ति होने दीजिये। आप सबके जीवन की सुख, शान्ति, समृद्धि, अहिंसा, प्रेम, सदभाव, मैत्री की मंगलमय कामना करता हूं।
सुखी रहे सब जीव जगत के कोई कभी ना घबराये.. इन्हीं अनन्त शुभ कामना भावनाओं के साथ सबके प्रति मेरी अनन्त शुभसंशायें… ।