उज्जैन । लोक भाषा हमारे विकास की मुख्य आधार शिला है।लोक भाषा को बनाये रखना हमारा दायित्व भी है। लोक भाषा हमारे संस्कारो संस्कृति की जननी है। हमे हमारे दैनिक जीवन मे इसे महत्व देना चाहिए।
उक्त विचार यो माया को मालवों या मालवा की माया के बेनर तले उज्जैन में राजेंद्र श्रोत्रिय की मालवी की कृति ई के कई ने करे कई के लोकार्पण समारोह में मालवी की वरिष्ठ कवियत्री साहित्यकार माया मालवेंद्र बड़ेका ने व्यक्त किये।आपने कहा किV राजेन्द्र श्रोत्रिय ने मालवी परम्परा व लोकोक्तिया,कहावतों के साथ मालवी गीतों का सुंदर समावेश कर इस पुस्तक को बहुउपयोगी बना दिया है ।वे निश्चित रूप से बधाई के पात्र है।इस अवसर पर मालवेंद्र बड़ेका ने कहा कि पाश्यात्य परिवेश के इस दौर में अपनी भाषा को सहेजने का प्रयास अभिनन्दनीय है।राजेन्द्र श्रोत्रिय ने कहा कि यह कृति हमारी अपनी पहचान को धरातल पर परिलक्षित करती है।समाज के लिए यह उपयोगी साबित होगी।ऐसा मेरा विश्वास है।इस अवसर पर साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।