अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)
महामारी और बीमारीयो ने छीन लि कई जिन्दगीऔर पैसे से लूटा गए कई परिवार। यह कटु सत्य है अभी मेडिकल प्रोफेशन मैं फैली अराजकता और बेहाली के लिए शासन प्रशासन जितने जिम्मेदार है हम भी उतने ही जिम्मेदार है। हॉस्पिटल जनता को लूटते रहे, मीडिया और जनप्रतिनिधि उन्हें चेताने में फैल रहे। मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट डॉक्टर को बचा लेती है। हममे से कई स्वयं अपने खुद के परिवार के स्वास्थ्य के प्रति बेहद लापरवाह रहे। प्रकृति से दूर रहना मानो अब हमारा स्वभाव हो गया, हमने हमारा शरीर इतना कमजोर बना लिया है जरा सा भी कुछ हो तो हम तुरंत डॉक्टर के पास इलाज के लिए पहुंच जाते हैं। जबकि हम सब जानते हैं कि हमारा शरीर स्वयं अपने आप पर इलाज कर सकता है। शरीर में यदी कोई भी व्याधि आती है तो उसका इलाज हमारा स्वयं शरीर कर सकता है। चमड़ी कटने पर नई चमड़ी आती है, हड्डी टूटने पर हड्डी स्वयं जुड़ती है पर हमने हमारे शरीर के विज्ञान को समझने के बजाय भौतिक विज्ञान को ज्यादा समझने में ध्यान दें दीया। आने वाली पीढ़ी को स्वयं के स्वास्थ्य की जागरूकता के बारे में ज्यादा माहिती होना चाहिए, ऐसा प्रयास रहे कम से कम आने वाली पीढ़ी मजबूत रहें। प्रकृति के नियम के अनुसार महामारी आएगी और हमें मारेगी उसका सामना करना है यदि हम शरीफ से और दिमाग से मजबूत है तो हम पूरी तरह सामना कर पाएंगे ।