

बड़ी सादड़ी कृष्ण वाटिका 27 मई 2022 । देश और कौम के प्रति अंतः करण के समर्पित भाव से न्याय और नीति की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर को तैयार रहता है वह सच्चा धार्मिक है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने महाराणा प्रताप की जन्म जयंती पर संबोधित करते व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि जिसमें स्वाभिमान नहीं वह जिंदे मुर्दे के समान है स्वाभिमान ही धर्म का असली प्राण है । मुनि कमलेश ने बताया कि स्वाभिमान की सूखी रोटी भी पांच पकवान से बढ़कर है और गुलामी के पांच पकवान जहर से भी खतरनाक है।
राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि अभिमान और स्वाभिमान में जमीन आसमान का अंतर है अभिमान मे स्वार्थ होता है स्वाभिमान ने त्याग और समर्पण होता है।
जैन संत ने कहा कि जिनका हम परोपकार है उनके प्रति वफादारी निभाना स्वाभिमान का प्रथम लक्षण है भव्य रक्तदान शिविर में सैकड़ों लोगों ने रक्तदान किया । मुनि कमलेश ने मरणोपरांत उपरांत नेत्रदान और देहदान का आव्हान किया।