रतलाम | भारत की महान महिला अमृता देवी और पर्यावरण रक्षक विश्नोई समाज द्वारा पेड़ को बचाने के लिए प्राणोत्सर्ग की घटना विश्व के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। खेजड़ली के शहीदों का यह बलिदानी कार्य आने वाली अनेक शताब्दियों तक पूरी दुनिया में प्रकृति प्रेमियों में नई प्रेरणा और उत्साह का संचार करता रहेगा।
उक्त आशय के विचार पर्यावरणविद डॉ॰खुशालसिंह पुरोहित ने राजस्थान में जोधपुर के निकट खेजड़ली में राष्ट्रीय पर्यावरण शहीद स्मारक अमृता बलिदान स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उपस्थित पर्यावरण प्रेमी मित्रों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 1730 में खेजड़ली गाँव में खेजड़ी के पेड़ को बचाने के लिए अमृता देवी के नेतृत्व में 84 गांवो के कुल 363 विश्नोईयो ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, इनमें 69 महिलाएं और 294 पुरुष शामिल थे। इन शहीदों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए बलिदान स्थल पर शहीद स्मारक का निर्माण किया गया है।
इस अवसर पर स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों के साथ ही पिछले 22 वर्षों से पर्यावरण चेतना अभियान चलाने वाले शिक्षक भैराराम भाखर, राजस्थान शासन के वरिष्ठ अधिकारी पर्यावरणविद बद्रीनारायण विश्नोई और रतलाम नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष सतीश पुरोहित विशेष रूप से उपस्थित थे।