रतलाम । न्यायालय श्री संतोष कुमार गुप्ता विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988) रतलाम जिला रतलाम म.प्र. द्वारा आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत पिता भगवानसिंह उम्र 61 वर्ष तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक पुलिस थाना सैलाना जिला रतलाम को 04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000/- रूपए अर्थदण्ड से दण्डित कर जेल भेजा । उक्त मामले की पैरवी सुश्री सीमा शर्मा, विशेष लोक अभियोजक (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम)जिला रतलाम द्वारा की गई ।
घटना का संक्षिप्त विवरण
विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त उज्जैन के विशेष प्रकरण क्रमांक 02/2015 में माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) श्री संतोष कुमार गुप्ता द्वारा आज दिनांक 01.06.2022 को पारित अपने निर्णय में लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत उम्र 61 वर्ष तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक पुलिस थाना सैलाना जिला रतलाम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 7 और 13(1) डी में दोष सिद्ध पाते हुऐ धारा 7 को 13(1) डी मे समाहित मानते हुऐ, बड़ी धारा 13(1) डी सहपठित धारा 13(2) के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध के लिए 04 वर्ष के सश्रम कारावास तथा कुल 1000/- रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित कर आरोपी को जेल भेजा गया।
शासन की ओर से पैरवीकर्ता सुश्री सीमा शर्मा, विशेष लोक अभियोजक (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के द्वारा बताया गया कि दिनांक 20.12.2014 को आवेदक गोपाल पिता नाथुलाल शर्मा उम्र 29 वर्ष निवासी ग्राम नामली जिला रतलाम ने लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में उपस्थित होकर थाना सैलाना के अपराध क्रमांक 274/2014 धारा 341,323,294,190,34 भादवि के प्रकरण के संबंध में एक लेखी शिकायत आवेदन पत्र इस आशय का प्रस्तुत किया कि उपनिरीक्षक ओमप्रकाश दुबे ने उसे, उसके पिता नाथुलाल और भाई महेश को दिनांक 18.12.2014 को सैलाना थाने पर बुलाया था जहॉ तीनों को गिरफ्तार कर थाने में बिठा लिया था और जमानत पर छोडने के लिए दुबे और एएसआई लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत ने 6,000/- रूपए रिश्वत की मांग की थी, रूपयों की व्यवस्था नही होने के कारण पूर्व परिचित एएसआई लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत से बात की तो लक्ष्मणसिंह ने दुबे से बात करके 4,000/- रूपए रिश्वत की राशि बाद में देने का तय करके जमानत करवा दी। इसके बाद दिनांक 19.12.2014 को लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत से मिल कर उन्हें बताया कि रूपयों की व्यवस्था नही हो पा रही तो लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत फिर से थाने में बंद करने की धमकी देने लगा। इस पर तत्कालीन निरीक्षक प्रशांत मुकादम विपुस्था लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन ने रिश्वत की मांग की जाने की पुष्टि की जाने के लिए आवेदक गोपाल शर्मा को रिश्वत संबंधी वार्तालाप को गोपनीय रूप से रिकॉर्ड करने के लिए शासकीय डिजिटल वाईस रिकॉर्डर देकर आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत और गोपाल शर्मा के मध्य हुई रिश्वत संबंधी बातचीत की रिकॉर्डिंग कराई गई। तत्पश्चात रिश्वत की मांग प्रमाणित पाए जाने पर, विधिवत ट्रैप कार्यवाही की गई। दिनांक 21.12.2014 को दोपहर करीब 02:00 बजे ट्रेपदल थाना सैलाना के करीब पहुचा, आवेदक गोपाल ने पुलिस थाना परिसर सैलाना में जाकर आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत को 3500/- रूपए रिश्वत की राशि दी जो उसने अपनी पेंट की जेब में रख ली परन्तु लोकायुक्त के दो आरक्षक विशाल रेशमिया और प्रकाश सती को आता देखकर शंका होने पर आरोपी लक्ष्मणसिंह दौडकर थाने के बरामदें में स्थित कम्प्युटर कक्ष में गया और रिश्वत की राशि अपने रूमाल में लपेटकर कम्प्युटर कक्ष में रिकॉर्ड रखने की अलमारी में रख दी। निरीक्षक प्रशांत मुकादम द्वारा ट्रेप की कार्यवाही की गई। मौके पर आरोपी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट पाउडर के घोल में धुलवाया गया तो घोल का रंग गुलाबी हो गया। आरोपी की पहनी हुई खाकी रंग की वर्दी की पेंट की दांई जेब को घोल में डुबोने पर उसका रंग भी गुलाबी हो गया। आरोपी का रूमाल जिसमें रिश्वत के रूपए रखे हुऐ थे को रूई के फाये से पोछ कर घोल में डुबाया तो घोल का रंग गुलाबी हो गया। आरोपी की निशादेही पर जप्त इन करेंसी नोटो के नंबरों का मिलान किए जाने पर ये नोट वही नोट पाए गए, जो लोकायुक्त कार्यालय में फिनाफ्थीलीन पावडर लगाकर आवेदक की जेब में रखवाए गए थे। प्रयोगशाला द्वारा फोरेंसिक परीक्षण में आरोपी के हाथ धुलवाने के घोल, आरोपी की पेंट एवं रूमाल के पोछन के घोल में फिनाफ्थलीन का परीक्षण धनात्मक पाया था।
विवेचना में आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत के द्वारा अपराध किया जाना पाए जाने पर आरोपी के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन द्वारा आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत के विरुद्ध अभियोग पत्र दिनांक 15.09.2015 को विशेष न्यायालय रतलाम में प्रस्तुत किया गया और उपनिरीक्षक ओ.पी. दुबे के विरूद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य ना पाकर उनका नाम पृथक किया गया। प्रकरण में विचारण उपरांत विशेष न्यायालय रतलाम द्वारा आरोपी लक्ष्मणसिंह चन्द्रावत को दोषसिद्ध किया गया।
बचाव पक्ष के द्वारा ली गई प्रतिरक्षा –
- आरोपी के द्वारा प्रतिरक्षा ली गई कि उसने दिनांक 09.12.2014 को आवेदक गोपाल शर्मा को गिरफ्तार किया था, तब उसने नाराज होकर देख लेने की धमकी दी थी इसलिए उसने रंजिशवश झूठा फंसाया है। आरोपी ने रोजनामचा सान्हा में दर्ज वापसी के सान्हा की नकल अपने समर्थन में प्रस्तुत की।
अभियोजन के तर्क – आरोपी द्वारा प्रस्तुत वापसी सान्हे में उल्लेखित है कि प्रधान आरक्षक आत्माराम के द्वारा गोपाल को गिरफ्तार किया गया था। रंजिश होने और रंजिश के कारण झूठा फंसाने संबंधी प्रश्न आवेदक गोपाल के प्रतिपरीक्षण के समय नही पूछे गए और प्रांरभ से ही आरोपी ने यह बचाव नही लिया। इसलिए यह बचाव आफ्टरथॉट होकर बाद में इस बिन्दु को नही उठाया जा सकता है।
बचाव पक्ष के द्वारा ली गई प्रतिरक्षा – - आरोपी ने अपने बचाव में रोजनामचा सान्हा की नकलें प्रस्तुत की थी जिनके अनुसार दिनांक 20.12.2014 को सुबह 10:20 बजे वह धामनोद बीट के लिए रवाना हुआ था और दूसरे दिन सुबह 05:00 बजे वापिस थाने पर आया था। इस प्रकार दिनांक 21.12.2014 को सुबह 07:40 बजे धामनोद बीट के लिए रवाना हुआ था।
अभियोजन के तर्क – आवेदक एवं अन्य साक्षियों को प्रतिपरीक्षण के दौरान आरोपी के अन्यत्र उपस्थित होने संबंधी सुझाव नही दिए गए थे। आवेदक के द्वारा आरोपी की थाने पर उपस्थिति के संबंध में दी गई साक्ष्य को चुनौती नही दी गई। अभियोजन के द्वारा दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्य से घटना के समय आरोपी की घटनास्थल अर्थात थाने पर उपस्थिति प्रमाणित की। दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में थाना सैलाना के रोजनामचा सान्हों की प्रतियां प्रस्तुत की।