जावरा (अभय सुराणा)। महाराणा प्रताप और अकबर के बीच संघर्ष स्वाभिमान और अभिमान, धर्म व अधर्म, न्याय व अन्याय, सत्य व असत्य,सदाचार व दुराचार तथा देशभक्ति व गद्दारी के बीच का संघर्ष था । जिसे राणा ने स्वधर्म स्वाधीनता और स्वाभिमान रुपी जीवन मूल्यों के आधार पर लड़ा।
उपरोक्त विचार विख्यात चिंतक, प्रखर वक्ता और विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सावला ने सुभाष चंद्र बोस व्याख्यानमाला समिति जावरा द्वारा आयोजित व्याख्यान के प्रथम दिवस पर स्थानीय कोठारी रिसोर्ट सभागृह में व्यक्त किए। इस अवसर पर आपने महाराणा प्रताप के विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध अपने संघर्षमय जीवन के कई ऐसे अज्ञात व अनछुए पहलुओं को स्पर्श किया जिन्हें देश के विद्यालयों, विश्वविद्यालयों में कभी पढ़ाया नही गया। श्री सावला ने बताया कि जिस प्रकार भगवान राम ने जनजागरण, जनसंगठन और जनसंपर्क द्वारा आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त की थी उसी प्रकार राणा प्रताप ने भी इन्हीं मंत्रों के माध्यम से मुगल आक्रांताओं पर विजय प्राप्त की । आपने इतिहास में बताए गए हल्दीघाटी के युद्ध संबंधी झूठ के पर्दे को हटा सच्चा इतिहास श्रोताओं के समक्ष रखा। हल्दीघाटी का युद्ध समरसता का भी अद्वितीय उदाहरण है। इसमें 14000 भील सैनिकों के साथ 36 जातियों के प्रतिनिधि अपने अपने सैनिकों के साथ लडऩे आए थे। इस युद्ध में राणा प्रताप के लिए 16 साल की तरुण भी लड़े और पुरुष वेश में हिंगलाज देवी भी लड़ी थी। हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की ओर से एक लाख 65 हजार सैनिक और महाराणा प्रताप की ओर से 22 हजार सैनिक लड़े थे अकबर के 1460 सैनिक ही जीवित लौट पाए । यद्ध में राणा प्रताप के घोड़े चेतक और उनके प्रिय हाथी रामप्रसाद का भी बलिदान इतिहास में दुर्लभ है। महाराणा प्रताप एक योद्धा ही नहीं पशु विज्ञान के विशेषज्ञ और कवि भी थे।
राणा प्रताप का सच्चा इतिहास बताकर हम अपने राष्ट्र के लिए शौर्यवान, वीर देशभक्त पीढ़ी का निर्माण करना चाहिए। माल्टा देश में महाराणा प्रताप की स्मृति में एक 1-1किलो के 100 चांदी के सिक्के ढालकर सम्मान किया।यह सिक्का दुनिया में सबसे बड़ा सिक्का है, जिसके एक ओर महाराणा प्रताप का चित्र और उनके जन्म-मृत्यु की तारीख अंकित है तो दूसरी ओर माल्टा देश का चिह्न व नाम है।
कार्यक्रम में बाबूलाल खेमसरा ट्रस्टी मोहनखेड़ा तीर्थ, इंदरमल दसेड़ा अध्यक्ष राजराजेंद्र वाटिका ट्रस्ट एवं सतीश उपाध्याय डायरेक्टर विष्णु गुड्स मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतमाता, सुभाषचंद्र बोस और महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन करके किया। अतिथियों का स्वागत व्याख्यानमाला समिति अध्यक्ष सुभाष टुकडिय़ा, सचिव अजय सकलेचा, कोषाध्यक्ष नितेश धनोतिया, वीरेंद्र सिसोदिया, फतेहलाल जैन, मनोहर पांचाल, पंकज कांठेड़, रजत सोनी, रणजीत सिंघल, संजय आंचलिया, अपार दसेड़ा, सोनाली जैन, दीपिका सिंह डोडिया आदि ने शाल श्रीफल प्रतीक चिन्ह देकर किया। अतिथि परिचय अजय सकलेचा ने किया स्वागत उद्बोधन सुभाष टुकडिय़ ने दिया। कार्यक्रम में अरुंधती ने गीत प्रस्तुत किया। कोमल जांगिड़ ने वंदे मातरम गाया। कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र श्रोत्रिय ने किया। आभार उमेश शर्मा ने माना।