साध्वी श्री पंक्तिवर्षाश्रीजी बने साध्वी श्री प्रीतवर्षाश्रीजी म.सा.




रतलाम । जैन आचार्य श्री बंधु बेलड़ी की निश्रा में रतलाम के नूतन दीक्षित बालमुनि श्री आदित्यचन्द्रसागर जी म.सा, साध्वी श्री पंक्तिवर्षाश्रीजी म.सा. एवं साध्वी श्री तीर्थवर्षाश्रीजी म.सा. ने अन्य दो नूतन दीक्षित मुनिराज के साथ गुजरात के आणंद शहर में पंच महाव्रत प्रतिज्ञा ग्रहण की। यंहा साध्वी श्री पंक्तिवर्षाश्रीजी का नवीन नामकरण साध्वी श्री प्रीतवर्षाश्रीजी म.सा के रूप में हुआ। मालवांचल से बड़ी संख्या में समाजजन इस भव्य महोत्सव के साक्षी बने।
आणंद शहर में बड़ी दीक्षा बंधु बेलड़ी आचार्य श्री जिनचन्द्रसागर सूरिजी म.सा,आचार्य श्री हेमचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, पंन्यास श्री लब्धिवल्ल्लभविजय जी म.सा, साध्वी श्री मेघवर्षाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 27 की निश्रा में विधिविधान से हुई। इसी उत्सव में नूतन मुनिराज श्री तत्त्वरागचन्द्रसागर जी म.सा. एवं बालमुनि श्री श्रीचन्द्रसागर जी म.सा. की भी बड़ी दीक्षा हुई। सामूहिक बड़ी दीक्षा में रतलाम, झाबुआ, मंदसौर,इंदौर, उज्जैन, मुंबई आदि स्थानों से पहुंचे समाजजनों ने वंदन कर संयम जीवन की अनुमोदना की। नूतन दीक्षित के पांच महाव्रत की प्रतिज्ञा स्वीकार करते ही उनका सभी ने जय जयकार और हर्षध्वनि के साथ अक्षत से वधामना किया।
क्या होते है पंच महाव्रत
आचार्य श्री बंधु बेलड़ी ने कहा कि जिनशासन में संयम जीवन स्वीकार करने वाले साधु- साध्वीजी के लिए भगवान महावीर स्वामी के पंच महाव्रत प्रतिज्ञा को स्वीकार करना आवश्यक होता है। इन महाव्रत मेंअहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य का पालन और रात्रि भोजन का त्याग होता है। बड़ी दीक्षा प्रसंग पर आचार्य श्री इन महाव्रतों की प्रतिज्ञा को नूतन दीक्षित को प्रदान करते है। जिसके बाद उनकी बड़ी दीक्षा सम्पन्न होती है और यही से नूतन दीक्षित को साधु जीवन के सभी व्रतों का पालनआजीवन करना होता है। पंन्यास श्री विरागचन्द्रसागर जी,पंन्यास श्री लब्धिवल्ल्लभविजय जी, गणि श्री पदमचन्द्रसागर जी एवं गणि श्री आनंदचन्द्रसागर जी म.सा. ने आशीर्वचन दिए। संगीत संवेदना जयेशभाई की रही।
वर्षभर में 12 दीक्षाएं
बंधु बेलड़ी आचार्य श्री की निश्रा में वर्ष भर में 12 दीक्षाएं विभिन्न स्थानों पर हुई है. जिनमे रतलाम में विगत 26 मई को दीक्षित 9 वर्षीय बालमुनि श्री आदित्यचन्द्रसागर जी म.सा.एवं साध्वी श्री पंक्तिवर्षाश्रीजी म.सा. जबकि 1 जून को सैलाना राजमहल में साध्वी श्री तीर्थवर्षाश्रीजी म.सा. रतलाम निवासी की दीक्षा हुई थी। वही 15 मई को इंदौर में बालमुनि श्री श्रीचन्द्रसागर जी म.सा. एवं शंखेश्वर महातीर्थ में 27 अप्रैल को मुनिराज श्री तत्त्वरागचन्द्रसागर जी म.सा. एवं ने संयम जीवन अंगीकार किया था। इन सभी की सामूहिक बड़ी दीक्षा आणंद
में हुई। सकल श्रीसंघ के स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी व़ीणादेवी पुरणमल जैन, सुरेश कुमार राजेश कुमार जैन परिवार मेघनगर का श्री श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ, आनंद द्वारा बहुमान किया गया।