अयोध्यापुरम गुरुकुल के विधार्थी रहे मुमुक्षु केवल बने मुनिराज श्री काव्यचन्द्रसागर जी म.सा.

आचार्य श्री बंधु बेलड़ी की निश्रा में इस वर्ष यह 13 वीं दीक्षा

आणंद । गुजरात में आणंद के समीप ग्राम अडास में जिनशासन रत्न बंधु बेलड़ी पू.आ.श्री जिनचंद्रसागर सूरीश्वरजी म.सा. एवम पू.आ.श्री हेमचंद्रसागर सूरीश्वरजी म.सा.आदि ठाणा की निश्रा में वर्षीय मुमुक्षु केवल भाई ने संयम जीवन स्वीकार किया। उनका नूतन नामकरण मुनिराज श्री काव्यचन्द्रसागर जी म.सा. रखा गया।
विगत एक वर्ष में पू.आ.श्री बंधु बेलड़ी की निश्रा में यह 13 वीं दीक्षा है। वे पूज्य पंन्यास श्री प्रसन्नचन्द्रसागर जी म.सा. के शिष्य बने है। सादगी एवं गरिमा पूर्ण समारोह में हुई दीक्षा मुमुक्षु केवल भाई को विधिविधान के साथ पू.आ.श्री बंधु बेलड़ी ने रजोहरण प्रदान किया। रजोहरण मिलते ही वे खुशी से झूम उठे।
बचपन से ही रुचि थी
सुरत के समीप ग्राम सायन निवासी नूतन दीक्षित मुनिराजश्री अयोध्यापुरम तीर्थ गुरुकुल के विधार्थी रहे है। उनकी तप आराधना और शासन सेवा में बचपन से ही गहन रूचि रही है। इसके पहले गुरुकुल के चार विधार्थी भी संयम जीवन को अंगीकार कर चुके है।
दीक्षा से पूर्व एक हजार किमी पदयात्रा
पू.आ.श्री बंधु बेलड़ी की निश्रा में मुमुक्षु केवल भाई ने उपधान तप, पंच प्रतिक्रमण सहित अन्य तप आराधना करते हुए कोई एक हजार किमी की पदयात्राएं की है। वे काफी समय से इस मंगल घड़ी की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे। संयम जीवन को लेकर उत्साहित मुमुक्षु केवल भाई बताते है कि आज मेरा संयम जीवन का मनोरथ पूर्ण हुआ है, अब सम्पूर्ण जीवन शासन सेवा में समर्पित करूंगा।
ढाई माह में 9 दीक्षाए
विगत एक वर्ष में पू.आ.श्री बंधु बेलड़ी की निश्रा में यह 13 वीं दीक्षा है। अभी तक 8 पुरुष और 5 बहनों ने संयम स्वीकार किया है। ये दीक्षाएं अयोध्यापुरम तीर्थ में चार मुमुक्षु, शंखेश्वर महातीर्थ और रतलाम में 3, ऊंझा, इंदौर और सैलाना में एक एक दीक्षाएं वर्ष भर में हुई है। जिनमे से 9 दीक्षाएं विगत ढाई माह में हो चुकी है।

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