प्रस्तावित मुंबई-दिल्ली औद्योगिक कॉरीडोर निर्माण हेतु दी जाने वाली भूमि में पर्यावरण पार्क, स्मृति वन और नगर वन की भूमि को शामिल करने के फैसले पर सरकार करें पुन: विचार करने एवं उक्त भूमि को मुक्त रखने की मांग – पर्यावरणविद डॉ. पुरोहित

रतलाम । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से प्रस्तावित मुंबई-दिल्ली औद्योगिक कॉरीडोर हेतु दी जाने वाली भूमि में पर्यावरण पार्क, स्मृति वन और नगर वन की भूमि को शामिल करने के सरकार के निर्णय पर पुन: विचार करने एवं उक्त भूमि को मुक्त रखने की मांग की गयी है।
पर्यावरणविद डॉ. खुशालसिंह पुरोहित ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि ‘मुझे पिछले दिनों यह जानकार आश्चर्य हुआ कि उद्योगिक कॉरीडोर के लिए भूमि आवंटन में पर्यावरण पार्क, स्मृति वन, नगर वन एवं अन्य पौधारोपण स्थल की भूमि को भी शामिल किया जा रहा हैं। यह निर्णय अत्यंत दुखद हैं जिसे पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक संगठन और रतलाम का जनसामान्य कभी भी स्वीकार नहीं करेगा। पर्यावरण पार्क में पिछले डेढ़ दशक में पंद्रह सो से अधिक पौधे लगाए गए है जो अब पेड़ बन गए हैं। पर्यावरण पार्क से पिछले डेढ़ दशक में हजारों लोगो ने पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा प्राप्त की हैं। स्मृति वन में नागरिकों ने अपने परिजनों की स्मृति में पौधे लगाएँ है जिनसे उनका भावनात्मक लगाव हैं, लोग यहा आकर अपने पूर्वजों के प्रति श्रध्दा के साथ ही प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान प्रकट करते हैं।Ó
डॉ?पुरोहित ने कहा कि सारा देश जानता हैं मध्यप्रदेश में ऐसी सरकार कार्य कर रही है जिसके मुखिया हर दिन एक पौधा लगाते हैं। पर्यावरण के प्रति ऐसे संवेदनशील मुख्यमंत्री के शासन में उद्योग के लिए पर्यावरण क्षेत्र की भूमि देने का निर्णय समझ से परे है। हम उद्योग के विरोधी नहीं है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर विकास के पक्षधर भी नहीं है। पर्यावरण और विकास में संतुलन आवश्यक है, पर्यावरण जीवन का आधार है और उद्योग जीवन का साधन हैं। इसी भावना के प्रकाश में सरकार को अपने कार्यों की समीक्षा करनी होगी। हमारी चिंता यह भी है कि पर्यावरण के लिए विकसित किए गए क्षेत्र को उद्योगों को दिये जाने का सरकार का यह निर्णय अपने ही मुखिया के कीर्तिकलश की आभा को कम करने का कार्य करेगा।

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