गंगा सागर पहाड़ी पर जंगल उगाने हेतु किया 1600 सीड बॉल का रोपण

रतलाम । प्रकृति को सहजने और हरित करने के लिये गंगासागर पहाड़ी पर बीजोत्सव मनाया गया। जिसमें 13 प्रजाति की 1600 सीड बॉल रोपित की गयी। सीड बॉल का निर्माण श्री माहेश्वरी समाज द्वारा 11,00 बॉल एवं आनंद क्लब रतलाम द्वारा 5,00 द्वारा बनाई गई थी इस प्रकार कुल लगभग 1600 सीड बॉल का रोपण किया गया।
पर्यावरण को सहजने के लिये विभिन्न तरह के प्रयोग और नवाचार हो रहे हैं। इसी कड़ी में सीड-बॉल जैसी तकनीक भी काम में ली जाने लगी है। सीड बॉल को फेंक कर या मिट्टी में दबाकर भी रोपण किया जा सकता है।
इस अवसर पर म.प्र. जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय, आनंद क्लब जिला समन्वयक सीमा अग्निहोत्री, पुष्पेंद्र सिंह सिसोदिया, ईश्वर सिंह राठौर, माहेश्वरी यूथ फाउंडेशन से उमेश व आशीष , पर्यावरण टोली विभाग विभाग संयोजक कपिल व्यास, खुशी एक पहल सचिव अमन माहेश्वरी, प्रगति नेचुरल के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिसौदिया, पर्यावरण विद जयप्रकाश चौहान, आदि की उपस्थिति में सीड बॉल लगाई गयी। इस अभियान में भूपेंद्र गहलोत, हिमांशी, सोनू, मनोज,संदीप नारले, सुरेंद्र अग्निहोत्री, अशोक मेहता सुषमा अग्निहोत्री ने सहयोग किया।
बारिश के मौसम से ठीक पहले सीड बॉल डालने से ये सीड बॉल मिट्टी के साथ घुल मिल जाते हैं और इसमें अंकुरण होने लगता है। कुछ समय बाद ये पौधा या वृक्ष का रूप भी ले लेते हैं।
कैसे तैयार करते हैं सीड बॉल
सीड बॉल तैयार करने के लिए काली और चिकनी मिट्टी को काम में लिया जा सकता है। इसमें कोलीनाइट, स्मेक्टाइट या बेंटोनाइट को मिलाया जा सकता है। इसके अलावा कंपोस्ट खाद को इसमें मिलाया जा सकता है। इसके बाद पोषक तत्वों के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। इसमें जरूरत के हिसाब से एक या अधिक बीज डालकर इसे लड्डू की तरह गोल बनाकर सूखने के लिए रख सकते हैं। सूखने पर ये सीड बॉल बन जाती हैं। इसमें एक बार काम में ली गई मिट्टी को दोबारा काम में नहीं लेना चाहिए। इसमें मिट्टी का रंग कुछ भी हो सकता है। वैसे लाल मिट्टी में रेड ऑयरन ज्यादा होता है। जरूरत के हिसाब से बारिश के मौसम या सर्दियों में भी इसे जंगल में वनारोपण के लिए डाल सकते हैं।