करीब 38 साल से ज्यादा समय बाद श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ एवं श्री साधुमार्गी जैन संघ आये एक मंच पर

निंबाहेड़ा । शासन दिपिका महासती श्री प्रेमलता जी मा.सा.आदि ठाणा 5 के बुधवार को हुऐ चार्तुमासिक मंगल प्रवेश ने इतिहास रच दिया साधुमार्गी जैन संघ एवं श्री वर्द्वमान स्थानकवासी जैन संघ का प्रतनिधि मण्डल विगत 8-10 सालो से इस बात को लेकर प्रयासरत रहा कि पुरा जैन समाज एक जाजम पर आ जाऐ लेकिन किसी न किसी बात को लेकर बात बन नही पाई लेकिन 39 सालो से जो दुरियां दोनो ही समाज के मध्य रही उन दुरियों को पाटने का कार्य इस चार्तुमासिक मंगल प्रवेश के दौरान साधुमार्गी जैन संघ की तरफ से की गई सकारात्मक पहल से हुआ संघ अध्यक्ष रतनलाल पोरवाल एवं मन्त्री सुशील नागोरी के नेतत्व में संघ की सहमति से एक प्रतिनिधि मण्डल श्री जैन दिवाकर भवन जाकर श्री वर्द्वमान स्थानक वासी जैन संघ के प्रतिनिधि मण्डल से इस मंगल प्रवेश के कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिये निवेदन किया जिस पर संघ के अध्यक्ष मोतीलाल रांका ने श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की साधारण सभा की मीटिंग बुलाकर संघ एकता के अग्रदूत जगत वल्लभ प्रसिद्ध वक्ता जैन दिवाकर पूज्य गुरुदेव श्री चौथमल जी महाराज के सिद्धांतों को याद दिलाते हुए निवेदन किया जिस पर साधारण सभा की मीटिंग में उपस्थित सभी सदस्यों ने बड़े सौहार्दपूर्ण माहौल में सर्व अनुमति से एक मंच पर आने का प्रस्ताव पारित करते हुए समाज ने गौेरव शाली निर्णय लेते हुऐ बुधवार को शेखावत सर्कल पर पुरे समाज के साथ एकत्र होकर साध्वी मण्डल का चरण वन्दन कर स्वागत किया और चल समारोह में समता भवन तक संघ ने पैदल ही शामिल होकर इतिहास रच दिया जिसे की नगर के अन्य सभी समाज के प्रतिनिधियों द्वारा सराहना करते हुऐ भुरी भुरी प्रसंशा की साथ ही 39 साल बाद हुऐ ऐतिहासिक मिलन को लेकर पुरे सकल जैन संघ में हर्ष व्याप्त हो गया। इस अवसर पर शासन दीपिका प्रेमलता जी म.सा. ने हर्ष व्यक्त करते हुऐ कहा कि हम सभी भगवान महावीर की संतान है और गीले शिकवे तो भाई भाई में हो ही जाते है लेकिन अब मिल ही गये हो तो इस तरह से गुलमिल कर रहे कि जैसे दुध में शक्कर मिल जाती है उन्होने कहा कि नगर को तपागच्छा के आचार्य सहित कुल चार चातुर्मास प्राप्त हुऐ है जिसमें सभी एक साथ मिल कर परस्पर सद्भावना, प्रेम एवं सोर्हाद से धर्म आराधना कर अपने जीवन को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करेगें तो ही यह मिलन सार्थक हो पाऐगा।