जो जिनेश्वर देव की वाणी को श्रध्दा भक्ति से श्रवण करता है वो अनन्त भवों के कर्म काटकर कुछ ही भवों में मोक्ष जा सकते है- तप चक्रेश्वरी श्री अरुणाप्रभाजी मसा

रतलाम । भगवती सूत्र में गौतम स्वामी ने पूछा की जिनवाणी सुनने से क्या लाभ मिलता है, प्रभु महावीर ने फरमाया की जिनवाणी सुनने से ज्ञान, ज्ञान से विज्ञान मिलता है, विज्ञान से प्रत्याख्यान और प्रत्याख्यान से कर्मों की निर्जरा होती है।
चातुर्मास काल में अनन्त अनन्त तीर्थंकरों द्वारा बताई गई जिनवाणी सुन सकते है। उत्तराध्ययन सूत्र में बताया गया है की ये जो जिनेश्वर देव की वाणी है जिसमें अनन्त-अनन्त तत्व छुपे हुए है, जो भी इस वाणी को श्रध्दा भक्ति से श्रवण करता है वो अनन्त अनन्त भवों के कर्म काटकर कुछ ही भवों में मोक्ष जा सकते है।
टन भर सुनकर कण भर भी आचरण में आ गया तो हमारा बेडा पार हो जाएगा। जिनवाणी को सुनकर रागी एंव द्वेषी व्यक्ति का राग द्वेष कम हो जाता है ।
राजगिरी नगरी में मरणासन्न अवस्था में एक वृद्ध अपने बेटे से अंतिम वक्त में एक वचन माँगता है की चाहे जो हो जाए भगवान महावीर की वाणी मत सुनना । बेटे को बहुत अचरज होता है की पूरी दुनिया भगवान महावीर जिनवाणी सुनना चाहती है लेकिन मेरे पिताजी ऐसा क्यों कह रहे है, लेकिन पिता का अंतिम वचन था इसलिए उसने उसका पालन किया। दिन महीने वर्षों वर्ष बीत गए। राजगृही नगरी का राजा श्रेणिक प्रभु महावीर का अनन्य भक्त था और प्रभु ने भी सबसे अधिक चातुर्मास राजगृही में किये। उस व्यक्ति के जीवन में क्या घटना घटित होती है ये आगे सुनने पर पता चलेगा।
शतावधानी पूज्याश्री गुरु कीर्ति मसा ने फरमाया की चातुर्मास एक यूनिवर्सिटी है, जिनवाणी क्लासेस है, श्रोता विद्धार्थी है, आगम सिलेबस है, मेमोरी एग्जाम है, सेवा प्रेक्टिकल है, परमात्मा एग्जामिनर है कर्म रिजल्ट है एंव नवतत्व परसेंटेज है।
मेरे महावीर को जानों गाथा की शुरुवात करते कहा की महावीर के सभी भवों को उनके हर रिश्ते नाते को अपने आप से अपने रिश्तों से जोड़कर देखो।
सभी तीर्थंकरों में केवल भवगन महावीर ही ऐसे है जिन्हें नरक के भव भी भोगने पड़े। ।कर्म किसी को नही छोड़ता है। भगवान महावीर का पहला भव नयसार के एक मूर्तिकार एंव चित्रकार के रूप में था। उसकी पत्नि शांत स्वभाव की सोच समझ कर बोलने वाली थी। नयसार बहुत कुशल कलाकार था। उसकी ख्याति राजा के पास कैसे पंहुचाती है आगे क्या घटनाक्रम होता है ये अगले प्रवचन में सुनने पर पता चलेगा।
संघ के अध्यक्ष सुरेश कटारिया महामंत्री जयंतीलाल डाँगी एंव कोषाध्यक्ष अमृत कटारिया ने बताया की कल दिनाँक 16 अप्रैल को नूतन दीक्षित साध्वी श्री अरुणकीर्ति जी मसा का जन्मदिन सामायिक दिवस के रूप में मनाया जाएगा इस अवसर पर सूरत से श्रीसंघ मसा के दर्शनार्थ रतलाम आएगा।

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