बड़ा मान मिले यह चाहना ना करें बड़ा मन बनाए यह कोशिश करें- मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.




महाड़। जिस घर में प्रेम होता है वहां लक्ष्मी रहती है। जिसके जीवन में धर्म होता है वहां सुख रहता है। जहां पुरुषार्थ होता है वहां भाग्य होता है और जहां सरलता होती वहां श्रद्धा रहती है। उक्त विचार महाड़ नगर में चल रहे यशस्वी चातुर्मास 2022 अंतर्गत परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के सुशिष्य रत्न प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने कहे। उन्होंने कहां अहंकार की उड़ान में जीवन की मुस्कान नष्ट हो जाती है आज लोग मुझे बड़ा मान मिले यह सोचते हैं किंतु बड़ा मन बनाने की जरूरत है। दूध दही से फट जाता है वैसे ही सबंध अहंकार से घट जाता है। मुनिश्री ने एक सुन्दर प्ररेक प्रसंग भी सुनाया। एक व्यक्ति हमेशा घोड़े पर ही आता-जाता था किसी के मरने पर भी घोड़े से जाता था, लोगों को बहुत बुरा लगता था, किंतु बड़े व्यक्ति से संबंध कौन बिगाड़े। एक दिन उस अहंकारी व्यक्ति के पिता चल बसे, उसने गांव के सभी लोगों के आने का इंतजार किया किन्तु कोई भी उसके घर नहीं आया । उस अहंकारी ने लोगों से कहा मेरे पिता को सम्मान से विदा करना है चलो सभी। तब गांव वालों ने जवाब दिया भैया घोड़े तैयार हो रहे है वे तैयार हो जाये फिर आयेगे। लड़का समज गया कि मैंने भी ऐसा ही किया और मैं भी कभी किसी के काम नहीं आया तो वे भी एसा ही कर रहे हैं । उसे अपनी गलती पता चल चुकी थी। उसने गांव वालों से माफी मांगी । गांव के लोग उसे शिक्षा देना चाहते थे,जो उसे आज मिल गई थी। इसलिए कभी अहंकार नहीं करना चाहिए।
मुनिश्री ने बाहुबली के अहंकार का प्रसंग सुनाया। सबसे बड़ा दुर्गण अहंकार है । विनय विद्या समकित सभी साधना में अहंकार बंधक बना जाता है। 07 अगस्त को संडे स्पेशल शिविर रखा गया है, जिसका टॉपिक है युवा तु वायु बन, किंतु विवेंक से बढा कदम प्रवचन पश्चात मुनिश्री ने सभी को पच्चक्खाण दिये। आज मुंबई से पधारे श्री मोहनखेड़ा तीर्थ के ट्रस्टी जयंतीलालजी बाफना एवं पुखराजजी बाफना, रमेशजी दोषी का श्रीसंघ एवं गुरु समर्पण चातुर्मास समिति ने बहुमान किया। श्री जयंतीलालजी बाफना ने अपने उद्बोधन में मुनिश्री की निश्रा में स्थानीय मंदिर जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ होने पर बहुत बड़ी राशि मंदिर निर्माण में देने की घोषणा की, जिससे श्रीसंघ में हर्ष व्याप्त हुआ। श्री राजेंद्र ऋषभ ज्ञान वाटिका पार्ट- 2 में प्रथम अस्मिता गांधी दूसरे स्थान में संयुक्त विजेता साधना देशरला एवं प्रीति देशरला तिसरे स्थान में ललिता कोठारी विजेता बनी। सान्तवना पुरस्कार मैं दिलीप सुकलेचा, बाबूलाल मांडोत, वासंती बेन ,इन्दू बेन, कुसुम बेन, सोनल बेन विजेता रहे। सभी को पुरस्कार मुंबई से पधारे अतिथियों ने दिया। RV group India यूट्यूब चैनल पर मुनिश्री के लाइव प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 09:00 से 10:00 तक दिखाये जाते हैं।