श्रद्धा व विवेक से किया हुआ धर्माचरण सफल बनता है- मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.


महाड। रोपकार सम्राट आचार्य प्रवर श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के सुशिष्य प्रवचन प्रभावक संत श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.मंगलचंद्र विजयजी का ज्ञानमय तपोंमय यशस्वी चातुर्मास चल रहा है। मुनिश्री ने विराट धर्मसभा में कहा श्रद्धा व विवेक से किया हुआ धर्माचरण सफल बनता है। भगवान ने भी कहा है विवेक में ही धर्म है। एक प्रश्न कर्ता ने पूछा प्रभु उठना,बैठना चलना-फीरना,खाना-पीना,सोना आदि सभी में पाप लगता है तो जीव इससे बचे कैसे?। प्रभु ने कहा जो विवेक से सारे कार्य करता है वह पाप से बच जाता है। किसी एक जिज्ञासु ने यह भी प्रश्न किया प्रभु संसार में दुर्लभ तत्व क्या? है। प्रभु ने कहा श्रद्धा परम दूल्लहा अर्थात श्रद्धा परम दुर्लभ है। रेगिस्तान में जल दुर्लभ है,पतझड़ में फल दुर्लभ है,बिमारी में बल दुर्लभ है वैसे ही संसार में मनुष्य जीवन व श्रद्धा का उपलब्ध होना परम दुर्लभ है।मुनिश्री के ज्ञान गर्भित ओजस्वी प्रवचनों को लोग भक्तिभाव से सुनते हैं। मुनिश्री ने आगे कहा श्रद्धा में संदेह नहीं होना चाहिए। शंका व संदेह करनी वाली आत्मा नष्ट हो जाती है। तर्क पूर्ण उदाहरण से मुनिश्री अपने विषय को सरल भाषा व तरिके से समझाते हैं, जिसे सुनकर श्रद्धालु आनंदित हो धर्म अभिवृद्धि के पथ पर बढ़ते हैं। चातुर्मास समिति ने बताया 12 अगस्त को मुनिश्री के मुखारविंद से परोपकार सम्राट द्वारा प्रदत ऋद्वि सिद्धि लब्धिवंत चमत्कारिक महामांगलिक का आयोजन किया जा रहा है। श्रावण माह की पूर्णिमा को होने वाली इस दूसरी महामांगलिक का लाभ नागोठाणा के परम गुरुभक्त श्री प्रकाशजी केवलसा मुथा परिवार है। रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस का सेलिब्रेशन भी होगा। रक्षाबंधन स्पेशन प्रवचन भी किया जावेगा। 12 अगस्त को रात्रि में 08:00 बजे से दस यतिधर्म सामुहिक तपाराधना के सभी तपस्वीयो का बहुमान समारोह होगा जिसका लाभ शांताबाई मोहनलालजी सुकलेचा व भक्ति भावना का लाभ सायरादेवी चंपालालजी भंडारी को प्राप्त हुआ । महामांगलिक एवं तप अनुमोदना कार्यक्रम मैं भक्ति भावना के लिए मुंबई के प्रसिद्ध सिंगर अनिस राठोर भक्ति की धूम मचायेगे। आगामी 16 अगस्त से 18 अगस्त तक त्रिदिवसीय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु के अट्ठम (तेल ) की आराधना होगी, जिसका लाभ प्रवीण कुमार कटारिया रत्नराज मेडिकल को मिला।