अब नहीं तो करोंगे कब, पर्यूषण में करों खूब तप आराधना-समकितमुनि जी म.सा.

  • कर ले संकल्प उड़ना है तपस्या के आसमान पर
  • शांतिभवन में दो दिवसीय विशेष प्रवचन करों तपस्या, मिटे समस्या

भीलवाड़ा, 22 अगस्त (निलेश कांठेड़)। पर्यूषण पर्व में दुकाने प्रवचन के बाद खुलेगी। इसका मतलब ये नहीं की घर पर सोते रहे बल्कि इसका मतलब ये है कि पर्यूषण की आराधना करें। हकीकत में ऐसा करने वाला ही सेठ श्रेष्ठ एवं श्रावक होगा। पर्यूषण के आठ दिन घर में मन नहीं लगना चाहिए। कई बच्चें बारिश में भी स्कूल पहुंचे है,यानि यदि दिल में तमन्ना हो तो बारिश बाधा नहीं है। आपके घर का माहौल ऐसा हो कि अगले दस दिन तक धर्म ध्यान के अलावा किसी पर चर्चा न हो। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शांतिभवन में सोमवार को पर्यूषण का आगाज होने से पहले दो दिवसीय विशेष प्रवचनमाला ‘‘करो तपस्या मिटे समस्या’’ के पहले दिन व्यक्त किए। उन्हांेंने पर्यूषण में तप का महत्व बताते हुए कहा कि अगले दस दिन ये चार शब्द किंतु, परन्तु, अगर, मगर जुबान पर नहीं आने चाहिए। उपवास कर लेते किंतु चाय की आदत है, किंतु के पीछे तपस्या का बलिदान क्यों करते हो। एक ही वाक्य दिमाग में घूमना चाहिए कि तपस्या अब पर्व पर्यूषण में नही ंतो कब करेंगे। हम असली है या नकली धर्मात्मा ये साबित करने के दिन शुरू हो रहे है। अभी नही ंतो फिर तप साधना कब करेंगे। मुनिश्री ने कहा कि बुधवार से पर्यूषण शुरू हो रहे है तो मंगलवार धारणा दिवस है यानि तप साधना करने का संकल्प लेने का दिन है। ये धारणा करो कि मुझे तपस्या के आसमान में उड़ना है और इस पर्यूषण में मुझे ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि संत आते है ओर तपस्या के आमसान में उड़ने की प्रेरणा देते है लेकिन हमे एकासना, बियासना के पेड़ दिखाई देते है इस कारण क्षमता होने पर भी खुले आसमान में उड़ नहीं पाते है। दो दिन प्रयास रहेगा कि आपके एकासना, बियासना के पेड़ गिर जाए और आप क्षमता का शत प्रतिशत दे पाए और आपको उपवास व तपस्या के पेड़ ही नजर आए। मुनिश्री ने कहा कि कई श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या की प्रेरणा प्रस्तुत की है ऐसे में ये पूर्वाग्रह नहीं रखे कि मेरे से तपस्या नहीं हो सकती। ये संकल्प कर ले कि इस पर्यूषण में मुझे तपस्या करनी है। किसे पता जो अब तक जिंदगी में नहीं हो पाया वह इस बार हो जाए। पूज्य समकितमुनिजी ने कहा कि इस बार तपस्या का शिव धनुष आपके सामने रख रहा हूं। जो राम होगा वह ही तपस्या का शिवधनुष उठा पाएगा। एक संकल्प करें कि मेरे परिवार में कोई एक सदस्य तो होगा जो तपस्या का शिवधनुष उठाएगा। ऐसा करने वालों को चार गतियों में परिभ्रमण करने से मुक्ति मिलती ही है। तपस्या की नदी में छलांग लगानी है क्या पता तपस्वी बनकर बाहर निकले। तपस्या की नदी में 100 जने छलांग लगाएंगे तो दस-पन्द्रह जने तो तपस्वी बनकर बाहर आएंगे। शुरू में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने गीत ‘‘तपस्या जीवन रो सिंगार’’ गीत प्रस्तुत किया। धर्मसभा में भवान्तमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य मिला। धर्मसभा में पूजा डांगी ने 11 उपवास का प्रत्याख्यान ग्रहण किया। उनका श्रीसंघ की ओर से सम्मान तपस्या की बोली बोलने वालो ने किया। हर्ष-हर्ष के उद्घोष के मध्य श्रीसंघ की ओर से तप की अनुमोदना की गई। संचालन श्रीसंघ के मंत्री राजेन्द्र सुराना ने किया। धर्मसभा में पाली से आए श्रावक संघ के प्रतिनिधियों का चातुर्मास संयोजक नवरतनमल बम्ब, श्रावक संघ अध्यक्ष राजेंद्र चीपड़, कंवरलाल सूरिया आदि ने स्वागत किया।
भिखारी मन से नहीं करें पर्व पर्यूषण का स्वागत
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि कई लोग तन के गुलाम और बहुत से लोग मन के गुलाम है। धन के गुलाम वो होते है जिनके पास पैसा होता है बैंकों में एफडी करा रखी लेकिन उसका भोग नहीं कर पा रहे है। पुण्यवानी से धन के राजा बन गए लेकिन मन के कंगाल हो गए। यदि हम पुण्य से राजा और मन के कंगाल तो समझना हम धन के गुलाम है। तन से राजा मन से भिखारी है। उन्हांेंने कहा कि जो मन से राजा नहीं बन पाए वह भले तन से राजा बन जाए लेकिन मन भिखारी जैसा ही रहेगा। पर्युषण हमे तन से नहीं मन से राजा बनने का मौका देता है। अभी कई धन से राजा लेकिन मन से नहीं है। ऐसे व्यक्ति न तो धन का स्वयं सदुपयोग करते है न दूसरों के काम आता है। जब तक भिखारी मन होगा व्यक्ति दान व परोपकार नहीं कर पाएगा। भिखारी मन लेकर पर्व पर्यूषण का स्वागत नहीं करें। मन से भिखारी होने पर तन तपस्या नहीं कर पाएगा। जिंदगी में ऐसे भिखारी मत बनो और मन को सामर्थ्यवान बनाओ। मन को राजा बनाने पर जिंदगी में कुछ भी कार्य कर सकते है। सेटिंग करना जानने वाला सेठ हो सकता लेकिन श्रेष्ठ नहीं हो सकता।
पर्यूषण की तप-धर्म आराधना बुधवार से
पूज्य समकितमुनिजी ने बताया कि शांतिभवन में 24 से 31 अगस्त तक पर्यूषण पर्व की अष्ट दिवसीय आराधना होगी। पर्युषण की इन्द्रधनुषी आराधना के तहत पहले दिन एकासना एवं दूसरे दिन उपवास/दया होगी। पर्यूषण में सामायिक पचरंगी भी रहेगी। एक दिन श्रावक एक दिन श्राविकाओं की पचरंगी रहेगी। पर्युषण में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक प्रवचन रहेंगे। सुबह 11 से 11.30 बजे तक प्रतियोगिताएं होगी। प्रतिदिन दोपहर 3 से 4 बजे तक कल्पसूत्र का वाचन होगा। प्रतिक्रमण आराधना प्रतिदिन शाम 6.45 से 8 बजे तक होगी। पर्यूषण अवधि में चौमुखी नवकार मंत्र जाप आराधना रात 8.15 से 9.15 की बजाय रात 8.30 से 9.30 बजे तक होगी। नवकार मंत्र जाप का समापन 30 अगस्त को होगा। पर्यूषण में 26 अगस्त को सुबह 7 से 8 बजे तक लोगस्स जाप होगा। जैन संगीत प्रतियोगिता 28 अगस्त को दोपहर एक से तीन बजे तक होगी। संवत्सरी की पर्व आराधना 31 अगस्त को होगी।

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