
मंदसौर 6 सितंबर 2022 । न्याय पर चलना और न्याय की रक्षा करना नंगी तलवार नंगे पांव चलने से भी कठिन काम है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने जिला न्यायालय परिसर मैं बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित मानवीय संवेदना और कानून सेमिनार को संबोधित करते कहा की न्याय की रक्षा करना धर्म और परमात्मा की रक्षा करने के समान है।
उन्होंने कहा कि सामान्य जनता के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना ही अत्यंत दुष्कर है सस्ता सुलभ और त्वरित न्याय मिले उसके लिए ज्यादा से ज्यादा लोक अदालत आयोजित होनी चाहिए।
मुझे कमलेश से कहा कि वर्षों के बाद किसी को निर्दोष मुक्त घोषित करने पर वर्षों की मानसिक यातना की पूर्ति कौन करेगा मानवाधिकार कानून का सरासर उल्लंघन है। राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि न्याय के लचीले कानून से अपराधी साफ बच निकलते हैं संविधान के कानून की पुन समीक्षा की आवश्यकता है।
जैन संत ने बताया कि मानवीय संवेदना से ओतप्रोत कानून से ऊपर उठकर भावनात्मक निर्णय लिए जाएं जनमानस अभिभूत हो जाएगा धूम्रपान विधायक पशु क्रूरता एक्ट कानून पर्यावरण कानून दारू बंदी कानून क्रूर मजाक के शिकार हो रहे हैं हम सब का कर्तव्य है कानून का कड़ाई से पालन करवाने के लिए अभिभाषक संघ को प्रशासन पर दबाव डालना चाहिए तो सफलता निश्चित है।
न्यायाधीश महोदय अजीत सिंह जी अभिभाषक संघ के अध्यक्ष रघुवीर सिंह पवार वरिष्ठ वकील कांतिलाल जी रातडिया राजेश जैन ने राष्ट्रसंत का अभिनंदन किया। मनोज वीरवाल जैन की ओर से प्रभावना वितरित की गई । अजीत खटोड़ पारस जैन ने सेवा का लाभ लिया अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच की ओर से अभिभाषक संघ का आभार व्यक्त किया मंच की अध्यक्ष रूपल संचेती मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित थी समारोह की अध्यक्षता रंजना बहन मुंबई ने की।