प्रभु वीर कहते हैं अभ्यास करने से कठिन तप भी सरल बना जाता है- मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.

महाड। परोपकार सम्राट आचार्य देव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के सुशिष्य रत्न प्रवचनदक्ष मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.मंगलचंद्र विजयजी म.सा.की पावन निश्रा में तपस्वी श्रीमति निशाबेन राजेशजी कटारिया के 16 उपवास तप अनुमोदना का भव्य आयोजन विरेश्वर मंदिर हॉल में संपन्न हुआ।
श्री छोगमलजी कटारिया के गृह निवास पर श्रीमति कमलाबाई छोगमलजी को मांगलिक श्रवण कराई पश्चात वरघोड़ा प्रारंभ हुआ। ठीक 11:00 बजे विरेश्वर पहुंचे। सर्वप्रथम गीतकार भरत ओसवाल ने संगीतमय गुरुवंदन कराया । मुनिश्री ने मंगलाचरण किया। भक्ति स्तवनों के साथ तप की अनुमोदना की गई। मंच के समक्ष बहुत सुंदर आकर्षण अक्षतों से रंगोली मंडान किया गया था वहीं पर तपस्वी निशाबेन व परिजनों ने गहुंली वधामणा किया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने कहा तप दातेंडे (एक तीक्ष्ण छोटा हथियार) की तरह हे जैसे दातेडा से फसल जल्दी कट जाती है वैसे ही तप द्वारा कर्म कट जाते हैं। प्रभु वीर ने भी कहा है तप करना कठीन है किंतु इसका अभ्यास जिसे हो जाता है वह कठिन को भी सरल बना सकता है। तप से कर्म निर्जरा व मोक्ष प्राप्त हो जाता है। मुनिश्री ने निशाबेन द्वारा किये गये 16 उपवास जैसे उत्कृष्ट तप की मुक्त कंढ से प्रशंसा की। मुनिश्री ने स्मरण भी दिलाया की स्तवन की एक सुंदर पुस्तक मारा प्रभु मोहनगारा का इसी चातुर्मास के दरम्यान विमोचन 8उपवास से करने का संकल्प लिया था वह निशाबेन ने 16 उपवास करके दिखा दिया। तपस्वी निशाबेन का श्री संघ एवं चातुर्मास समिति ने अभिनंदन पत्र से बहुमान किया ।इस मौके पर 8 से 10 अक्टूबर को होने वाले त्रिदिवसीय महोत्सव के जय जिनेंद्र का लाभ हीराचन्दजी देवीचंदजी ओसवाल एवं स्वामीवात्सल्य का लाभ दिलीप जी देरासरीया को तथा एक दिवसीय विशाल भक्ति भावना का लाभ छोगमलजी कटारिया को मिला उसकी उद्घोषणा कि गई। नवरत्नजी देरासरिया ने जन्मदिन निमिते जीवदया में घोषणा की। प्रभु आरती मंगलदीवा व सुरी ऋषभ आरती आयोजक, राजेश छोगमलजी कटारिया ने उतारी। गौतम स्वामीजी की एवं गुरुदेव राजेंद्र सुरीजी की आरती कल्याण के मनोजजी जवेरचंदजी पीतानीया भारुंदा वाले ने उतारी। 14 अक्टूबर को होने वाले श्री गौतम लब्धि महापूजन में रत्नमाला समर्पणम् का लाभ नागुठाना के मुकेशजी जैन को मिला। तपस्वी निशाबेन सहित अन्य सभी को गुरुदेव ने पच्चक्खाण कराये। टीना प्रवीणजी कोठारी द्वारा सभी तपस्वीयो को नवकार की सुंदर आराधना कराई जा रही है। अंत में मुनिश्री ने मांगलिक श्रवण कराई। बाद में बहनों ने तप अनुमोदना में सांजी चौविसी गीत का मंगलमय आयोजन किया।

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