अशोक मेहता
( आपका सच्चा सलाहकार) इंदौर
जब से इंटरनेट सैटेलाइट का विकास हुआ आम व्यक्ति की जिंदगी पहले तो बहुत सुलभ होती गई परंतु जैसे ही सोशल मीडिया प्रारंभ हुआ व्यक्ति की जिंदगी गलत दिशा में मुड़ गई उसका अधिकतर धन समय और वैचारिक स्तर मोबाइल टीवी लैपटॉप पर बर्बाद होना शुरू हो गया। अब यह दृश्य देखने को मिलते हैं कि चाहे छोटा बच्चा हो या बड़ा, वह पिकनिक स्पॉट, शॉपिंग मॉल, सड़क या चाहे बगीचे में हो भले ही सुबह हो या शाम दिन हो या रात हर समय उसके पास उसका मोबाइल मिलेगा उसके हाथ में, जेब में या फिर मोबाइल को देखते हुए पाया जाएगा। बिना काम के मोबाइल देखना उसकी फितरत हो गई और मोबाइल पर सब गलत गलत ऐप के जरिए अपनी आदते बिगाड़ रहा है। इसका सीधा असर उसके स्वभाव व्यवहार पर भी आ रहा है। आज के कई 2 साल तक का बच्चा बिना मोबाइल के खाना नहीं खाता है दूध नही पीता है और उसकी आदत उसके माता-पिता ने बिगाड़ी। समय है अब भी मोबाइल और टीवी देखने का एक समय बांध ले और नहीं तो सप्ताह में एक दिन मोबाइल बंद रखे और टीवी वगैरह ना देखें अखबार न पढ़ें और कोई नेगेटिव बातें ना करें ना सोचे। जिंदगी के सुहाने पल परिवार के साथ मित्रों के साथ प्रकृति के बीच बिताएं आप मुझे याद करेंगे और कहेंगे अशोक भाई ने सही राय दी।