वृहद साधु सम्मेलन इंदौर – 2015 में स्वीकृत महत्वपूर्ण प्रस्ताव* –
साभार – स्वर्ण विहान*
प्रस्तुति – सुरेन्द्र मारू, इंदौर
मो. 98260 26001
मुनिराज – महासती जी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी श्रावक संघ की है। श्रावक अपने क्षेत्र में विहार- सुरक्षा- सेवा- मंडल की स्थापना करें। उस मंडल के निर्देशानुसार विहार क्रम में रहे। सूर्योदय से पूर्व विहार नहीं हो। यदि मार्ग में श्रमण संघ के अनुयायी क्षेत्र न हो तो संघ की जिम्मेदारी होगी कि संत- सती जी को श्रमण संघीय क्षेत्र तक सुरक्षित पहुंचाएं। आगे उस क्षेत्र की जिम्मेदारी होगी।
साधु – साध्वी जी के विहार साथ – साथ न हो। बीहड़ और भयप्रद स्थान पर संरक्षण देना आपवादिक प्रसंग है। जो वैन, कार, टेंपो आदि संत – सती जी के साथ हैं वे मात्र इस वर्ष ( 2015 ) स्वीकृत किए गए चातुर्मास स्थल पहुंचने तक साथ रखे जा सकेंगे। उसके बाद इन्हें नियमित रूप से रखने का निषेध कर दिया गया है। यह महारंभी जीव हिंसा का प्रकट शस्त्र है। संत- सती अपने सामान के लिए इसका उपयोग न करें। विहार मैं अशक्त, व्याधिग्रस्त, वृद्ध मुनि एवं साध्वी जी के लिए व्हील चेयर का प्रयोग यह अपवादिक प्रसंग है। उत्सर्ग मार्ग तो पैदल चलने का ही है अत: व्हील चेयर का प्रयोग वही करें जो किसी कारण से अशक्त है।
यह भी देखा गया कि व्हील चेयर के नीचे बैटरी, इंजन या कोई मशीन लगा दी जाती है, वह बटन दबाने पर स्वत: चल पड़ती है। यह तो कार में चलने के समान ही है। हिंसा का कारण भी है। अत: व्हील चेयर के साथ जो भी यंत्र है, उन्हें हटवा दिया जाए। स्वचालित व्हील चेयर बंद कर दी गई है।
साधु – साध्वी जी महाराज अकस्मात व्याधिग्रस्त हो जाए उन्हें निकटवर्ती या दूरवर्ती हॉस्पिटल में वाहन द्वारा पहुंचना आवश्यक हो तो एंबुलेंस का प्रयोग किया जा सकेगा। एंबुलेंस उपलब्ध न हो तो जो भी साधन हो प्रयोग करें, साधु – साध्वी जी को हॉस्पिटल पहुंचाएं। श्रावक संघ इस सेवा में तनिक भी ढील ना वरतें। संत – सती जी की प्राण रक्षा अत्यावश्यक है।
उनके साथ सेवा में यथा संभव एक साधु या साध्वी सेवा में जाएं। यदि बीमार साधु-साध्वी जी को एक मुनि न संभाल पाए उस स्थिति में दो साथ जाएं। पीछे यदि एक साधु-साध्वी जी भी रह जाएं तो सुविहित विधि से पाद विहार करके जाए। अनावश्यक रूप से एंबुलेंस या यांत्रिक वाहन न लगाएं।
स्वस्थ होने पर प्रवर्तक – व्याधि ग्रस्त और साथ सेवा में जाने वाले साधु- साध्वी की अवधि की आलोचना सुनकर शुद्धिकरण करें। आपवादिक परिस्थिति के अलावा वाहन में विहार न करें।
न विभिन्न स्थानों के आयोजनों में सम्मिलित होने जाएं। इस नियम का उल्लंघन करने वाले उन श्रमण – श्रमणियों के साथ श्रमण संघ के संत – सती जी का वंदन व्यवहार आहार संबंध समाप्त कर दिया गया है। वाहन विहारी आलोचना करके यथोचित शुद्धिकरण करे तो बात अलग है, किंतु यह शुद्धिकरण प्रांत प्रवर्तक और आचार्य प्रवर ही कर सकते हैं। दोनों की सम्मति होना आवश्यक है। बिना कारण यांत्रिक वाहन में विहार करने पर दो साल की दीक्षा कम करने का निर्णय लिया गया है।