



महाड । महाड नगर यशस्वी चातुर्मास में विराजित परोपकार सम्राट गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के सुशिष्य प्रवचनदक्ष मुनिप्रवर श्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा.की पावन निश्रा में परोपकार सम्राट की 17वीं मासिक पुण्यतिथि गौरवशाली रुप में आयोजित की गई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी महाराज साहेब ने एक चमत्कारिक प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया गुरुदेवश्री हमेशा केरवा की बनी विशिष्ट माला से निरंतर जाप करते रहते थे। उनकी जाप आराधना के प्रभाव से कई प्रकार के सामाजिक शासन के कार्य सफलता पूर्वक होते थे। वि.संवत 54की साल मगसर (दिसंबर) माह में एक बार राजगढ़ नगर में गुरुदेव श्री कि वह माला कहीं गुम हो गई काफी ढूंढने के बाद भी नहीं मिली, तब गुरुदेव श्री ने एक पर्ची पर विशिष्ट मंत्र लिखकर ध्यान आराधना में लीन हो गए और कुछ ही समय में वह माला तुरंत संथारा में से मिल गई। ऐसे सैकड़ों प्रसंगों का साक्षी में रहा हूं । गुरुदेव श्री के संग शासन के कार्य करते हुए 28 साल तक रहा। गुरुदेव श्री ने इतने समय तक जो हमें प्रेम स्नेह दिया,इस हेतु हम अपने आप को पुण्यशाली मानते हैं। मुनिश्री ने आगे बताया आज जो कुछ भी मैं हूं गुरुदेव श्री की कृपा व आशीर्वाद से हु। उन्होंने मुझे होनहार व योग्य बनाया, जिससे समाज में कुछ कर दिखा सके। गुरुदेवश्री की हर शिक्षामयी बातें मंत्र की तरह काम आती है और आगे भी काम आती रहेगी। गुरुदेवश्री के चरणों में अनंत वंदना करता हूं। बोलते-बोलते मुनि श्री भावुक भी हो गए। धर्मसभा को कई वक्ताओं ने संबोधित किया। लादुलालजी गांधी,त्रिशला महिला मंडल, बाबुलालजी गांधी,वासंतीबेन शाह ने गुरु महिमा पर गीत समर्पित किया।
बाबुलालजी गांधी ने बताया गुरु भी प्रभु की तरह तिण्नाणं तारयाणं का कार्य करते हुए आत्मज्ञान की राह बताते हैं और वो मुक्ति कराते हैं । उपाश्रय भवन में लगे हुए सुवाक्य बैनर की समीक्षा करते हुए संयम की आराधना की प्रशंसा की और कहां गुरु द्वारा मोक्ष की सीढ़ी मिल सकती है। राजमलजी कोठारी एवं महावीरजी देसरला ने मोहनखेड़ा विकास के कार्य की सराहना की। महावीरजी ने कहा मैं 18 साल से मोहनखेड़ा जा रहा हूं और हर बार मुझे गुरुदेव का आशीर्वाद मिलता है मैं उनसे मुलाकात करके धन्य हो जाता हूं। उनके बताए हुए सेवा मार्ग पर सभी को चलना चाहिए। जरूरतमंद की सेवा करनी चाहिए,और गीत भी गाया। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अशोकजी शाह ने कहा गुरुदेव ने कई शासन के कार्य प्रतिष्ठा अंजनशलाका, छ:रि पालक संघ, उपधान, गौशाला, स्कूल आदि कार्य कराए हैं, जिनकी यादें आज भी स्मृति पटल पर अंकित है। उनसे अच्छे कार्य करने की प्रेरणा लेना चाहिए और कहा परोपकार सम्राट ज्योतिष के महान विद्वान थे। कार्यक्रम की शुरुआत में सकल श्रीसंघ ने गुरु वंदना की। मुनिश्री ने मंगलाचरण किया एवं सूरि ऋषभ इक्कीसा का पाठ कराया। अंकिता कटारिया व जया ओसवाल ने गहूंली की। समाज के प्रबुद्ध जनों ने और महिला विभाग ने परोपकार सम्राट के चित्र पर माल्यार्पण किया एवं धूप दीप प्रकट किया। कार्यक्रम के अंत में गौतमस्वामीजी की आरती अशोकजी शाह एवं राजेंद्र सूरीजी की आरती प्रवीणजी कटारिया तथा ऋषभचंद्र सूरीजी महाराजा की आरती महावीरजी देसरला परिवार को मिली । आयोजन के अंतर्गत 17 वीं मासिक पुण्यतिथि निमित्त 17 आकर्षक गिफ्ट लादूलालजी गांधी की ओर से लक्की ड्रा द्वारा रखे गए। प्रभावना महावीरजी देसरला ने की एवं लड्डू की प्रभावना नवरत्नजी देरासरिया ने की । एकासना का लाभ महावीरजी देसरला परिवार को प्राप्त हुआ। जिसमें उत्साह से पुरुष- महिला ने भाग लिया। आभार संघ अध्यक्ष दिलीप सुकलेचा,छौगमलजी कटारिया हीराचंदजी ओसवाल ने संयुक्त रूप से किया।