- बदनसीब भाई को खुशनसीब बनाने की शक्ति बहन के पास
- शांतिभवन में नियमित प्रवचन में भाईदूज प्रसंग पर चर्चा
भीलवाड़ा 26 अक्टूबर (मीडिया प्रभारी-निलेश कांठेड़)। रिश्ते जो संभाले हुए है उन्हें कभी-कभी बिना बुलाए भी संभाल लेना चाहिए। बिना बुलाए संभालते रहने पर रिश्ते संभले हुए रहते है। किसी को समय पर संभाला तो वह सारी जिंदगी तुम्हे संभालेगा लेकिन किसी को समय पर नहीं संभाला तो हो सकता वह रिश्ता ही खत्म हो जाए। बहन ही है जो उस भाई को संभाल सकती जिसे कोई नहीं संभाल पा रहा हो। बहन यदि निस्वार्थ भाव से भाई का सही मार्गदर्शन करें तो भाई के सोए हुए नसीब जगते है। ये विचार आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शांतिभवन में बुधवार को धर्मसभा में भाईदूज प्रसंग पर प्रवचन में भगवान महावीर के बड़े भाई नंदीवर्धन व उनकी बहना सुदर्शना के रिश्ते की चर्चा करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बहन को कभी अपने स्वार्थ के लिए भाई को नहीं भटकाना चाहिए। बहन में ये शक्ति है कि वह बदनसीब भाई को खुशनसीब भी बना सकती है और शूपर्णखां की तरह भटकाने पर खुशनसीब भाई भी रावण की तरह बदनसीब हो सकता है। समकितमुनिजी ने कहा कि भगवान महावीर के निर्वाण प्राप्त होने पर गमगीन भाई नंदीवर्धन को संभालने का कार्य उनकी बहन सुदर्शना ने ही किया। सुदर्शना ने ही भोजन नहीं कर रहे अपने भाई के मुंह में हाथ से भोजन का कोर डाला। नंदीवर्धन के एक कोर मुंह में लेते ही पूरा कुण्डलपुर मुस्करा उठा और घर का वातावरण सहज होने लगा। तभी से भाईदूज का पर्व मनाया जाने लगा। मुनिश्री ने कहा कि जब कभी भाई को जरूरत है ओर बहन संभालने और सहयोग के लिए पहुंच जाए तो वह दिन भाईदूज है। भूखे भाई को जीमाने का कार्य बहन ही कर सकती है। अपने भाई से आगे सहधर्मी भाई व उससे भी आगे मानवजाति के सभी प्राणी को संभालना चाहिए। हमारे देने से दूसरों को नहीं हमें ही मिलता है। ये नहीं सोचे कि मैं दे रहा हूं इसलिए दूसरों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जो हमे प्राप्त हुआ है उसकी समय पर कद्र करते रहो। हमारी आदत है जो हमे मिला उसके प्रति लापरवाह हो जाते है। सोच ऐसी हो जाती है कि ये तो मिला हुआ है कहां जाएगा। जिसके पीछे भाग रहे वह मिले या न मिले लेकिन जो मिला हुआ वह छूट जाता है। धर्मसभा में प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा. एवं गायन कुशल जयवंतमुनिजी का भी सानिध्य मिला। अतिथियों का स्वागत शांतिभवन श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र चीपड़ ने किया। धर्मसभा का संचालन श्रीसंघ के मंत्री राजेन्द्र सुराना ने किया।
जिंदगी में मत दो किसी को अंतराय
पूज्य समकितमुनिजी ने कहा कि भूख लगती पाप के उदय से और भोजन मिलता पुण्य के उदय से। ये दोनों चीज साथ-साथ चलती है। आप आज खा रहे है तो यह पहले की मेहनत है। कई करोड़पति व्यक्ति भोजन शांति से नहीं कर पाते है तो इसका कारण उन्होंने कही न कही अंतराय दी हुई है। जब ऐसा होगा तो सामने थाली परोसी हुई होगी लेकिन भोजन शांति से नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि जिंदगी में किसी को अंतराय नहीं देनी चाहिए। पगंत में बैठ गए व्यक्ति को उठाने की अंतराय मत देना ये स्वयं पर बहुत भारी पड़ेगी और वह शांति से भोजन नहीं कर पाएगा। थाली के साथ कभी अपनी टेंशन नहीं परोसनी चाहिए अन्यथा बहुत मुश्किल हो जाती है।
भाई का हिस्सा छीन सकते हो लेकिन भाग्य नहीं
समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि पहले बड़े भाई को पितातुल्य समझा जाता था। वर्तमान में हालात बदल गए है भाई-भाई के बीच विवाद का प्रमुख कारण बंटवारा है। एक भाई के भोलेपन का फायदा होशियार भाई उठा लेता है लेकिन यह जान ले कि भाई घर छिन सकता, हिस्सा छिन सकता लेकिन भाग्य नहीं छीन सकता। ये बात दिमाग में बैठ जाए तो विवाद की स्थिति बहुत सीमित हो जाएगी। परमात्मा महावीर के जीवन, भगवान कृष्ण के जीवन आदि से सीख सकते है कि भाई के साथ भाई का प्रेम कैसा होता है।
पंच दिवसीय प्रवचनमाला जुग-जुग जियो बुधवार से
पूज्य समकितमुनिजी ने बताया कि मंगलवार को धर्मसभा में भाईदूज के पर्व पर उससे जुड़े प्रसंगों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि बुधवार से पंच दिवसीय प्रवचनमाला जुग-जुग जियो शुरू होगी। इसमें बताया जाएगा किस तरह आशीर्वाद व दुआएं प्राप्त करके जीवन को सुखी व समृद्ध बनाया जा सकता है। ये प्रवचनमाला इच्छाकारणम पाठ पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि इस पाठ को अब तक बोलते आए है अब आराधना का पाठ बनाना है। इच्छाकारणम पाठ की आराधना सच्चे मन से हो जाए तो ये पाठ मुक्ति तक पहुंचा देता है।