निरंतर चातुर्मासिक प्रवचन से हरा भरा हो रहा महाड़ श्रीसंघ

महाड। परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के सुशिष्य प्रवचनदक्ष मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.की पावन निश्रा में त्रिदिवसीय दीपावली पर्वोत्सव तप जप आराधना के साथ मनाया गया। कई आराधको ने बेला एवं तेला तप कर प्रभु वीर एवं गौतम स्वामी प्रभु को तपान्जली अर्पित की। मुनिप्रवरश्री ने धारा प्रवाह प्रभु की अंतिम देशना, क्या? कहा प्रभु वीर ने विषय पर प्रवचन फरमाया। मुनिश्री ने कहा पावापुरी में प्रभु ने अंतिम देशना में प्रथम विनय पर प्रकाश डाला पारिवारिक व्यवस्था एवं अध्यत्मिक जगत दोनों में विनय का होना बहुत जरूरी व कारागार है। उत्तराध्यन सूत्र के 36 अध्याय की मुनिश्री ने अद्भुत अनुपम स्वाध्याय यात्रा कराई । अमावस्या के दिन 25-10-22 को रात्रि में 12:00 बजे प्रभु वीर के निर्वाण कल्याण का देववंदन कराया गया, जिसमें श्रीसंघ की विशेष उपास्थिति में प्रभु के अंतिम समय की संवेदना द्रविद्र हदय से मुनिश्री ने कराई। प्रातः शुभ बेला में प्रभुजी के द्वार का उद्रघाटन मंत्रोच्चार के साथ मुनिश्री की निश्रा में अशोकजी शाह परिवार द्वारा किया गया । प्रभु वीर एवं गौतम स्वामीजी के कल्याणक का लड्डू प्रवीणजी कटारिया द्वारा चढ़ाया गया। श्री वासुपूज्य प्रभु का लड्डू अशोकजी शाह द्वारा एवं श्री राजेंद्र सुरीजी को लड्डू हिराचंदजी देवीचंदजी ओसवाल द्वारा चढ़ाया गया। प्रभु आरती व मंगल दीया दिलीप जी सुखलेचा ने लिया। गौतम स्वामीजी की आरती अशोकजी शाह श्री राजेंद्र सूरिजी की आरती एवं श्री ऋषभचंद्र सूरिजी की आरती महावीरजी देसरला द्वारा की गई। मुनिश्री ने एकम की शुभप्रभात में दिनांक 26-10-22 को श्री गौतमस्वामी रास महामांगलिक विविध राग में गाकर श्रवण कराई।

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