
इटखोरी । 1008 श्री शीतलनाथ भगवान के जन्मस्थली भदलपुर इटखोरी ग्राम में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अन्तर्गत आज तीसरे दिन दीक्षा कल्याणक महोत्सव बहुत हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया । झारखण्ड राजकीय अतिथि श्रमण मुनि श्री विशल्यसागर जी गुरुदेव के सानिध्य में आज तीर्थंकर बालक शांति कुमार का सुबह मंगल बेला में राज्याभिषेक किया गया।तत्पश्चात दिििग्वजय के यात्रा निकली।राज्य का संचालन करते कॉफी समय बीता गया कि एक दिन बादल का आकस्माद नष्ट हो जाना देख तीर्थंकर बालक शांति कुमार को वैराग्य हो गया और वट वृक्ष के नीचे बैठकर दीक्षा धारण कर ली। इसी बीच पू . गुरुदेव के मंगल उद्दबोधन सुनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ पू. गुरुदेव ने अपने उद्बोधन में कहा किआज का दिन इतना महत्वपूर्ण है कि इसका उद्देश्य संसार में पर्यटन नहीं भौक्तिता की दौड़ मे नहीं जीना है बल्कि जीवन को मंदिर बनाकर जीना है । मन के द्वारा अंतरंग में प्रवेश कर जाना ही मंदिर में पहुँचना है ।जन्म लिया है ऐसा जन्म जो पदार्थों की दौड़ तक हो ,परमार्थ तक न पहुँचे तो जन्म हमारा निरर्थक है ।जब यह जीव परमार्थ की दौड़ में चलता है तो उसका जन्म कल्याणक के रुप में मनाते है। बोध और बोधि का समन्वय होना जरूरी है।धार्मिक नही बनना धर्मात्मा बनना । धर्मात्मा के अंदर धर्म कण- कण में बास करता है धार्मिक दो चार घंटे के लिए बनता है धर्मात्मा जीवन भर के लिए रहता है ,धर्मात्मा इसलोक को सुधारता हैसभी कार्यक्रम प्रतिष्ठचार्य अजित जी शास्त्री,ओर कोडरमा के पंडित अभिषेक जैन के साथ संघस्थ अलका दीदी ओर भारती दीदी के निर्देशन में हो रहा है। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा ने दी ।