लेखक : प्रो.डी.के.शर्मा
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वर्तमान में दुनिया गंभीर संकट काल से गुजर रही है। इस विकट परिस्थिति के कारण से सभी अवगत है। फिर भी इस संकट की जितनी चर्चा की जाए उतनी कम। आप समझ ही गए होगे कि हमारा इषारा युक्रेन संकट की ओर है। रुस के राष्ट्रपति पुतिन संभवत: अपने पुराने रुसी साम्राज्य को फिर से स्थापित करना चाहते है। हमें याद करना होगा कि 20 सदी के अन्त में विशाल रुस कई छोटे छोटे देशों में विभाजित हो गया था। रुस के कई लोगो को यह विभाजन रास नहीं आया। पुतिन उनमें प्रमुख है। यद्यपि पुतिन लम्बे समय से सत्ता में है किन्तु ऐसा लगता है कि जीवन के आखिरी पड़ाव में रूस को पुराने स्वरुप में लाने कि इच्छा तीव्र हो गई है। उन्होंने क्रिमिया जैसे छोटे देशो को दो चार दिन के युद्ध के बाद रूस में मिला लिया है। युक्रेन के बारे में भी उन्होंने ऐसा ही कुछ सोचा होगा। किन्तु उनसे गलती हो गई। युक्रेन रूस से अलग होने के बाद एक विकसित ओर शक्तिशाली देश बन चुका है। उसके पास एटम बम बनाने की क्षमता है। वह दुसरे देशो को हथियार भी बेचता रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी उसने बहुत प्रगति कर ली है। हमारे देश के विद्यार्थी भी युक्रेन पढऩे जाते रहे है।
पुतिन की इच्छा हुई होगी कि ऐसे विकसित देश जो कभी रूस का भाग रहा हो उसे भी रूस में मिला लिया जाए। इससे रूस की शक्ति बहुत बढ़ जाएगी। उन्होने सोचा होगा कि यह काम आसान होगा। किन्तु वे गलती कर बैठे। युक्रेन भावनात्मक रुप से एक स्वतंत्र देश बन चुका था और शक्तिशाली भी। स्वाभाविक ही है। कोई भी व्यक्ति अथवा देश एक बार आजादी का आनंद लेने के बाद फिर गुलाम होना पंसद नही करता है। यही युक्रेन के साथ हुआ। पुतिन से युक्रेन कि इच्छा और इच्छाशक्ति के आंकलन में गलती हो गई। पुतिन ने सोचा था कि कुछ ही दिन मे युक्रन को युद्ध में हरा देंगे किन्तु नो माह होने पर भी युद्ध का अन्त पुतिन कि इच्छानुसार होता दिखाई नही देता। सभी जानते है कि अमेरिका और नाटो देषो की मदद से युक्रेन रूस को कड़ी टक्कर दे रहा है और पुतिन युद्ध जीतने के लिए एटम बम का उपयोग कर सकते है।
यही पर पेंच है। यदि रूस ने एटमीषक्ति का उपयोग किया तो अमेरिका ओर नाटो भी रूस के विरूद्ध ऐसा कर सकते है। उत्तरी कोरिया भी अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी देता रहता है। वहां का तानाशाह किम नई-नई परमाणु मिसाइल का परीक्षण करता रहता है। चीन भी ताइवान को हड़पने के लिए उतावला है। स्थिति विकट है। युद्ध केवल दो देशो के बीच में हो रहा है किन्तु संकट में पूरी दुनिया है। यदि रूस ने एटम शक्ति का प्रयोग किया तो युक्रेन के पास के कई युरोपीय देष प्रभावित हो सकते है। वे अधिकतर देष नाटो संधि के सदस्य हैं। अमेरिका ने उन कई देशो में एटम बम तैनात कर रखे है। प्रतिक्रिया तीव्र होगी ओर विनाश असीमित। अभी तक एटम बम का प्रयोग केवल एक बार अमेरिका ने जापान के विरूद्ध किया था। पुतिन भी उससे हुए विनाष को जानते ही है। इसलिए उन्हे परमाणु हथियार के उपयोग से बचना चाहिए। वैसे भी उनके युक्रेन पर आकमण से कोई भी सहमत नही है, उनके देष के लोग भी नही।
पुतिन को हिटलर की गलती याद रखना चाहिए। उसकी जर्मन साम्राज्य स्थापित करने की इच्छा ने पूरी दुनिया को युद्ध में धकेल दिया था। पूरी दुनिया उसे एक खलनायक के रूप मे याद करती है। कोई भी समझदार व्यक्ति हिटलर के साथ अपना नाम लिखवाना नही चाहेगा। पुतिन को यह बात समझनी चाहिए। पूरी दुनिया आशंकित और आंतकित है। युद्ध विनाश करता है किन्तु उसका अन्त बातचित से ही होता है। पुतिन को उदारता दिखा कर समस्या का शांतिपूर्ण हल निकालना चाहिए। विष्व उनको धन्यावाद देगा।
एक नई खबर आई कि इरान रूस की सहायता के लिए युद्ध में कुदने वाला है। वह रूस को सहायता कर ही रहा है। निष्चित ही यह पुरे विश्व के लिए खतरे कि घंटी है। सयुंक्त राष्ट्र संघ प्रभावहीन निरर्थक संस्था हो गई है। अब विश्व को विनाश से कोई चमत्कार ही बचा सकता है। प्रतिदिन समाचार आ रहा है कि रूस युक्रेन पर एटम बम गिराने वाला है यदि ऐसा हुआ तो बहुत विनाशकारी होगा।