आध्यात्मिक सिद्धांतों को जब तक नहीं अपनाएंगे तब तक धार्मिकता में प्रवेश असंभव : राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

रतलाम  22 दिसंबर 2022 । भोग विलास और पाश्चात्य संस्कृति के रंग में रंगे हुए आध्यात्मिकता ढोल पीटना धार्मिक होने की दुहाई देना धार्मिक सिद्धांतों के साथ खिलवाड़ करना है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने मोहन टाकीज भोयरा बावड़ी में धर्म सभा को संबोधित करते कहा कि दैनिक जीवन शैली में आध्यात्मिक सिद्धांतों को जब तक नहीं अपनाएंगे तब तक धार्मिकता में प्रवेश असंभव है ।
उन्होंने कहा कि आज भी हम अंग्रेजों की पाश्चात्य संस्कृति की गुलामी की बेडिय़ों से जकड़े हुए हैं यहअत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है । मुनि कमलेश ने बताया कि पाश्चात्य संस्कृति का हमला आतंकवाद और परमाणु बम से भी अनंत गुना ज्यादा खतरनाक है जो हमारी संस्कृति संस्कारों सभ्यता को कुचल रहा है ।
राष्ट्रसंत स्पष्ट कहा कि संस्कृति का निर्माण महापुरुषों के आध्यात्मिक ज्ञान के सहारे हुआ है उसी के सारे हिंदुस्तान विश्व गुरु बना पूरा विश्व आज भी भारत को आशा की निगाह से देख रहा है । जैन संत ने कहा कि भोगवादीपाश्चात्य संस्कृति रोग अशांति की जननी आध्यात्मिक संस्कृति सुख समृद्धि शांति और निरोगता का प्रतीक है विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है ।
अंत में कहा कि पाश्चात्य देश दुखी होकर उसका त्यागकर आध्यात्मिक संस्कृति के योग नियम ध्यान साधना को बना रहे हैं दुर्भाग्य जिसको वह थूक रहे है उसे हम चाट रहे हैं भौतिकवाद की चकाचौंध में हम जैन संतों का निर्माण होना यह किसी चमत्कार से कम नहीं है इसका सारा से आध्यात्मिक संस्कृति को है अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार विचार मंच नईदिल्ली  वैज्ञानिक ढंग से आध्यात्मिक संस्कृति को विश्व की कोने-कोने में पहुंचाएगा और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण मुक्ति दिलाएगा गौतम मुनि जी ने मंगलाचरण किया । प्रवचन में राजेश कटारिया, प्रतूष लोढ़ा, निलेश लोढ़ा, सम्यक बंबोरिया, मंजू श्रीमाल, सारिका लोढ़ा, शांतिलाल जी उपस्थिति थे। उक्त जानकारी अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच युवा सखा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी निलेश बाफना ने दी।

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