
जावरा (अन्न क्षेत्र जन कल्याण समिति 28 दिसंबर 2022) । अन्न संत धर्म और परमात्मा से भी बढ़कर है इसके बिना जीवन जीने की करने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने संबोधित करते हुए कहा कि अन्न झूठा छोडऩा उपेक्षा करना अपमान करना धर्म और भगवान का अपमानकरने के समान है । उन्होंने कहा कि खिलाकर खाए वह संस्कृति है छीन कर खाए वह शैतान है स्वयं भूखा रहकर दूसरों को खिलाएं वह धरती पर चलता फिरता देवता है।
उन्होंने कहा कि हमारा असली प्राण अन्न है इसका दान सर्वश्रेष्ठ दान है मानव सेवा ही माधव सेवा है यह मूल मंत्र सभी धर्मों कीआराधना का श्रृंगार है । राष्ट्रसंत ने कहा कि दुखी और पीडि़त को अनदेखा कर साधना करने वाले को कभी धर्म और परमात्मा प्राप्त नहीं हो सकते।
जैन संत ने बताया कि खुदा और भगवान मंदिर मस्जिद गिरजाघर में नहीं बल्कि असहाय बीमार और निर्धन मैं है इनकी निस्वार्थ भाव से सेवा भक्ति करने वाला ही धर्म और मोक्ष का अधिकारी है ।
संस्था के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश ओस्तवाल उनके प्रतिनिधिमंडल के द्वारा राष्ट्र संत का शाल भेंट करअभिनंदन किया डायलिसिस सेंटर फिजियो थेरेपी कंप्यूटर क्लास अस्पताल जीव दया कुत्ते बंदर गायों के लिए प्रतिदिन सेवा के कार्यों से अवगत कराया 300 से 400 व्यक्ति प्रतिदिन निशुल्क भोजन प्रसाद स्वीकार करते हैं मुनि कमलेश की प्रेरणा से आपातकालीन पशु एंबुलेंस एवं संकटकालीन गौशालाओं को सहायता देने का प्रस्ताव पास किया ।