महापुरुषों की हजारों साल की साधना भूमि श्री सम्मेद शिखर तीर्थ को भोग, विलासिता और वासना में परिवर्तित करने का षड्यंत्र है – राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

ढोढर जैन दिवाकर सामाइक भवन 3 जनवरी 2022 । श्री सम्मेद शिखर तीर्थ स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में परिवर्तन करना संत को डाकू के रूप में और सति को वेश्या के रूप में प्रस्तुत करने के समान है । उक्त विचार राष्ट्रीय सर्व धर्म संसद के चेयरमैन राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने धर्म सभा को संबोधित करते कहा की महापुरुषों की हजारों साल की साधना भूमि को भोग विलासिता और वासना में परिवर्तित करने का षड्यंत्र है । मुनि कमलेश ने कहा कि सम्मेद शिखर तीर्थ के साधना मय संस्कारों से लाखों संतों का निर्माण हुआ है विश्व स्तर पर हिंदुस्तान महा मंडित हुआ है ।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि संपूर्ण संपत्ति दान देकर भी एक साधक आत्मा के पवित्र परमाणुओं का निर्माण नहीं किया जा सकता । राष्ट्रसंत ने कहा कि सम्मेद शिखर ही नहीं मंदिर गुरुद्वारे किसी भी धर्म स्थल की पवित्रता के साथ कुठाराघात किया जाएगा छेड़छाड़ किया जाएगा धर्म सांसद उसके लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगी । ग्रंथि राजपाल सिंह ने कहा कि सभी महापुरुष हमारे पूजनीय है सम्मेद शिखर तीर्थ को पर्यटन करना आध्यात्मिक संस्कृति की हत्या करने के समान है बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
महंत गोविंदाचार्य ने कहा कि तीर्थ की रक्षा के लिए संतो को सैनिक की भांति उसकी रक्षा के लिए आगे आना पड़ेगा । फादर रेवरेंट पैट्रिक ने कहा कि सात्विक संस्कारों की रक्षा करना ही धर्म और परमात्मा की रक्षा करने के समान है संस्कारों का निर्माण होता है पवित्र स्थलों से। लामा लॉन्ग जंग ने बताया कि महापुरुषों के सभी स्थलों को तीर्थ स्थल के रूप में सरकार घोषित करें पवित्रता की रक्षा करें राज्य धर्म निभाएं ।मौलाना अखलाक अहमद ने कहा कि पवित्रता नष्ट करना महापुरुषों के सिद्धांतों को पाव तले कुचलने के समान है जन भावना का सरकार सम्मान करें । मूर्तिपूजक महासती श्री मुक्ति रिया जी ने कहा कि अहिंसा की संस्कृति को कुचलना राष्ट्र का महात्मा गांधी के अहिंसा सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाने की समान है। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली प्रस्ताव पास करके झारखंड के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को भेजा जा रहा है दिल्ली में भी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अपनी भावना से अवगत कराएगा ।

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