अखंड रवि पुष्य नक्षत्र सूर्योदय से पहले शुरू होता है और सूर्यास्त के बाद पूर्ण होता है सामान्य रूप से जो पुष्य नक्षत्र होता है, उससे भी ज्यादा रविवार के दिन आने वाला पुष्य नक्षत्र विशेष फलदाई होता है। उसमें भी ऐसा अखंड रवि पुष्य नक्षत्र अनेक गुना ज्यादा फल देता है
पुष्य नक्षत्र को वृद्धि कारक, पुष्टि कारक कहा गया है। इसलिए इस नक्षत्र में जो भी कार्य करते हैं उसकी वृद्धि होती है ।
अभी के मौजूदा हालात अनुसार नीचे दिए गए मंत्र का संकल्प पूर्वक जाप करना है।
अरिहंत सिद्ध आयरिय उवज्झाय सव्व साहू सव्व धम्म तित्थयराणं*
नमुत्थुणं स्तोत्र
इस दिन का विशेष मंत्र
ॐ ह्रीं नमो सिद्धाणं
ॐ ऐं नमः
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः*
ॐ ह्रीं अर्हं नमः
ॐ ह्रीं अर्हं आरुग्ग बोहिलाभं समाहि वर मुत्तमं दिंतु🔸*
नवकार मंत्र गिने।