साभार:जैनदिवाकर ज्योतिपुंज खंड4/ 148 प्रवचानांश पू. श्री चौथमलजी म.10.02.49
प्रस्तुति :सुरेन्द्र मारू
संसार मार्ग कीओर लेजाने वाली पांच बातें है। मन को संसार की ओर ले जाने वाली पहली वस्तु वस्त्र है,क्योंकि वस्त्र की ओर ही सबसे पहले दृष्टि आकर्षित होती है।वस्त्र की चमचमाहट निराली होती है।वस्त्र धारण करने का उद्देश्य लज्जा की रक्षा करना और शरीर को गर्मी-सर्दी के आघा त से बचाना है।पहले इसी प्रयोजनसे वस्त्रों का प्रचलन हुआ।जब तक यह उद्देश्य प्रधान रहा तब तक तो गनीमत रही,परंतु धीरे-धीरे मनुष्य में फैशन का भाव जागृत हुआ।इस नवीन भावना की जागृति ने वस्त्र को श्रृंगार -प्रसाधन कारूप दे दिया।फिर तो लज्जा की रक्षा तो एक किनारे धरी रह गई और श्रृंगार ही एकमात्र ध्येय बन गया।आज वस्त्र व्यवसाय ने भयानक रूप धारण कर लिया है।प्रतिदिन नए-नए लुभावने नमूने तैयार होते हैं कि जिनका ठिकाना नहीं। इस फैशन- परस्ती से आर्थिक हानि तो होती ही नैतिक हानि भी बड़ी जबरदस्त हो रही है।”फैशन परस्ती अनीति और अधर्म को उत्पन्न करती है”।