गाय आर्थिकता का आधार, प्रकृति का प्राण स्वास्थ्य के लिए रामबाण औषधि से भी बढ़कर है- राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

धुंधडका गौशाला । एक गांव में 5 मंदिर हो सकते हैं तो एक गौशाला क्यों नहीं जो कि करुणा और दया का सबसे महान तीर्थ है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि गाय आर्थिकता का आधार, प्रकृति का प्राण स्वास्थ्य के लिए रामबाण औषधि से भी बढ़कर है।
उन्होंने कहा कि प्राणियों के निमित्त से हमारे में दया करुणा और सद्भाव का संचार होता है वह हमारे लिए परमात्मा से बढ़कर है।
मुनि कमलेश ने बताया कि इंसान के बिना पशु जिंदा रह सकता है लेकिन पशु के बिना इंसान एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता पशु की हिंसा इंसान की हत्या से बढ़कर है।
राष्ट्रसंत ने बताया कि पर्यावरण कानून में हरे वृक्ष की डाली तोड़ना अपराध है तो फिर पशुओं पर खंजर चलाने की इजाजत कैसे पशुओं का कत्ल पर्यावरण कानून का कत्ल करने के समान है पृथ्वी बचाओ अभियान में प्रत्येक प्राणी की रक्षा करना संविधान में सरकार का कर्तव्य है।
जैन संत ने दुख के साथ बताया कि एक गाय को कोई मार दे तो हंगामे के लिए हजारों की जनता रोड आ जाएगी नेतागिरी स्वार्थ की रोटियां सेकने के लिए वह गो माता के कट्टर दुश्मन हैऔर एक गाय जख्मी हो उसको निस्वार्थ भाव से संभालने वाले सच्चे धार्मिक हैं।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली जिला इकाई मंदसौर दलोदा की ओर से गौशाला मे डॉ. अजीत जैन वसंत पटवा, ललित जैन, दीपक जैनम ऋषभ भंडारी, मनसुख मेहता, सुधा भंडारी, रुचिता भंडारी, रानू मोगरा, हिरा देवी भटेवरा, प्रमिला भटेवरा आदि ने गौ सेवा का लाभ लिया। गौशाला अध्यक्ष आशाराम पाटीदार ने राष्ट्रसंत का अभिनंदन किया।

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