स्वरचित गीत
लेखक – सुनिल मेहता “कान्हा”
बड़ीसादड़ी (राज.) मो- 9928605662
प्रताप गुरुवर सरल स्वभावी थे,
मेल मिलाप वाले प्रवचन फरमाते थे
जी -2
प्रताप गुरुवर…….
वचनों को सुनकर लोग, जीवन को सजाते थे,
घर को लोग अपने, स्वर्ग बनाते थे जी -2
इसीलिए उनके दिवाने हजारों थे -2
मेल मिलाप वाले ,,,,,(1)
उनके जीवन की एक सच्चाई थी,
भेदभाव भक्तों में, कभी नहीं करते थे जी-२
जात-पात ऊंच-नीच के, बंधनों से मुक्त थे -2
मेल मिलाप वाले…..(2)
देवगढ़ में गुरु ने जन्म शुभ पाया था,
मंदसौर में गुरु ने संयम को धारा था जी-2
देने वाले जन्म माता-पिता याद आते हैं-२
मैल मिलाप वाले…….(3)
भोली-भाली सूरत उनकी सब को सुहाती थी,
छोटी-छोटी बातें उनकी मन को महका थी जी-2
सादगी वाला जीवन गुरुवर बिताते थे-2
मेल मिलाप वाले……(4)
जैन दिवाकर ने जो राह बताई थी ,
उसी राह को गुरूवर ने हम को दिखाई थी जी-2
गुरु दिवाकर के वो तो दीवाने थे-2
मैल मिलाप वाले——(5)
याद उनकी आती है देखो आज सबको,
आंखों से आंसू नहीं रुकते हैं अब तो-2
मेवाड़ भूषण को “सुनील” करता नमन है-२
मेल मिलाप वाले…….(6)
प्रताप गुरुवर….…..
मेल मिलाप वाले……