जैसे प्रभु महावीर व इन्द्रभूति गौतम जी एवम राम जी – हनुमान जी की जोड़ी थी वैसे गुरु जैन दिवाकर व उपाध्याय प्रवर श्री प्यार चंद जी म.सा की गुरु शिष्य की जोड़ी थी

प्रस्तुति – विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा( पूणे)
उपाध्यक्ष अ. भा. श्वे स्था. जैन कांफ्रेस ज्ञान प्रकाश योजना नइ दिल्ली
मंत्री जैन दिवाकर साहित्य प्रकाशन समिती चितौड़ गढ़( राज.)

संक्षिप्त – जीवन वृत
उपाध्याय श्री प्यार चंद जी म.सा का जन्म रतलाम में हुआ आपके पूज्य पिता श्री पूनम चंद जी बोथरा व मातुश्री श्री मति मानबाइ थे जब आप पांच वर्ष के ही थे आपके माता जी पिताजी का देहान्त होगया आपकी दादीजी ने आपका लालन पालन किया
जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथमल जी म.सा का रतलाम पदार्पण हुआ उनके प्रथम दर्शन व प्रवचन से ही आपको वेराग्य आ गया।
संवत 1969 की फाल्गुन शुक्ला पंचमी को चितौडग़ढ़ दुर्ग पर आपकी दीक्षा सम्पन्न हुई । आप जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथमल जी म.सा के साथ ही रहते थे आप के46 वर्षावासो में 35 चातुर्मास गुरुदेव के साथ ही हुए इसमें यह उल्लेखनीय है कि गुरुदेव के देवलोक गमन होने के बाद आपके 8 चातुर्मास हुए याने गुरुदेव के साथ रहते हुए 38 में से35 चातुर्मास गुरु सेवा में ही हुए
गुरुदेव के प्रवचन का संकलन करना एवम प्रकाशित करवाना सम्पादन की पूरी भूमिका उपाध्याय श्री की ही रहती थी । संवत 1991 में मन्दसोर में आपको गणी पद प्रदान किया वृहद श्रमण संघ निर्माण पर उपाध्याय पद पर सुशोभित हुए । आपने गुरुदेव द्वारा रचित साहित्य के सम्पादन एवम प्रकाशन में मुख्य भूमिका निभाइ! यह आपका ही प्रयास था कि निग्रन्थ प्रवचन का विभिन्न भाषाओ में अनुवाद करा कर भारतीय जनता के लिए सुलभ करवाया।
दशवैकालिक सूत्र, सुखविपाक, नमिराय अध्ययन, पूच्छीसूणम, ज्ञाता धर्म कथा, अन्त कृतागं सुत्र, कल्प सूत्र, प्राकृत व्याकरण, आदि सूत्रो व ग्रन्थो का अनुवाद तथा जैन जगत के उज्जवल तारे , जैन जगत की महिलाए, आदर्श मुनि, आदर्श उपकार, पर्युषण पर्व के आठ व्याख्यान, मृगा पुत्र पुस्तको का लेखन किया एवम गुरुदेव के द्वारा रचित स्तवनो का संकलन किया इस तरह !उस समय साहित्य का वह कार्य किया जो बड़ा मुश्किल लगता था आपने किया!
संघ व सम्प्रदाय संचालन में विशेष भूमिका
जैन दिवाकर जी महाराज के संघ एक्यता के मिशन को आगे बढ़ाने में तथा कई विशेष अवसरो पर नितिगत निर्णय लेने में चाहे वह अवसर वीर वर्धमान श्रमण संघ की स्थापना को हो जिसमें गुरुदेव जैन दिवाकर जी के निर्देश पर आचार्य श्री आनन्द ऋषी जी म.सा को आचार्य पद प्रदान करने का हो तथा उसके बाद जैन दिवाकर जी के देवलोक गमन होने के बाद संवत 2009 में वृहद साधु सम्मेलन हो , आपकी भूमिका प्रमुख रही ।
आपके शिष्य परिवार में मन्ना लाल जी म.सा( ब्यावर) तपस्वी श्री पन्ना लाल जी म.सा, श्री गणेश मुनि जी सिद्धान्त शास्त्री , तपस्वी श्री वक्तावर मल जी म.सा . श्री उदयमुनि जी शास्त्री आदि थे ।
आपका देवलोक गमन 46 वर्ष की संयम साधना के बाद संवत 2016 की पोष शुक्ला दशमी तदानुसार 8 जनवरी 1960 को अल्प बिमारी के बाद गजेन्द्र गढ ( कर्नाटक) में आपका देवलोक गमन हुआ।
आपके देवलोक गमन पर विभिन्न चारित्र आत्माओ ने जो श्रद्धाजंली अर्पित की उसमें प्रमुख उस समय श्रमण संघ के उपाचार्य श्री गणेश लाल जी म.सा. ने कहा कि मेरी एक भुजा मेरे से अलग हो गइ है । उपाध्याय श्री केवल मुनि जी ने उपाध्याय श्री प्यार चंद जी म.सा के बारे में एक लेख में लिखा कि लाखों वर्षो के बाद जैसे राम के साथ हनुमान का नाम, हजारो वर्षो बाद प्रभु महावीर और गौतम स्वामी की , चन्द्रगुप्त मोर्य ओर चाणक्य की जोड़ी का नाम प्रमुख हे वेसे ही हमारी संत परम्परा में गुरुदेव श्री जैन दिवाकर जी का व उपाध्याय श्री प्यार चंद जी म.सा की गुरु शिष्य की जोड़ी का नाम हमारे मस्तिष्क पटल पर घूमता है ऐसे उपाध्याय प्रवर के 111वी दीक्षा जयन्ती पर हार्दिक भाव सुमन! आपके द्वारा संघ व जिन शासन के लिये किया गया कार्य सदैव अमिट रहेगा ! आपका वरद हस्त सदा बना रहे।

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