

रतलाम। परमात्मा मंत्र के अधीन हैं और मंत्र ब्राह्मण के वैदिक कर्मकांड कराने वाले विप्रबन्धु जो समाज को सही दिशा निर्देश और मार्गदर्शन प्रदान करते आ रहे है विप्रबन्धु का यह भी कर्तव्य है कि वह वैदिक विधानों क़े वैज्ञानिक आधार को भी जनमानस तक पहुंचाएं तथा जनमानस में वैदिक विधानों क़े वैज्ञानिक महत्व से उनको रूबरू कराने का कार्य ब्राह्मण ही कर सकता है उक्त मन्तव्य ओंकारेश्वर से पधारे वीतराग स्वामी निर्मल चेतन्य जी महाराज ने कही।
स्वामी राजेंद्र पुरी जी महाराज सहित स्वामी देवस्वरूप जी महाराज ने अपने उद्बोधन में 16 संस्कारों के पुनरुत्थान और जनमानस में 16 संस्कारों के वैज्ञानिक आधार के महत्व पर प्रकाश डाला।
वैदिक जाग्रति ज्ञान-विज्ञान पीठ के तत्वावधान में रतलाम जिले के समस्त वैदिक कर्मकांड कराने वाले विप्रबन्धुओ की वृहत बैठक स्थानीय अखंड ज्ञान आश्रम सैलाना बस स्टैंड पर रखी गई , इस बैठक का उद्देश्य था कि समाज में सामाजिक समरसता की स्थापना हो साथ सामाजिक स्तर पर धार्मिक आयोजन विप्रबंधुओं द्वारा किए जाए व कुछ समय से कुछ पंचांगों की विसंगति के कारण विप्रबंधुओं को समाज क़े समक्ष शर्मिंदा होना पड़ता हैं , इस हेतु आगामी समय के तिथि त्यौहार पर एकमत रहते हुए सभी विप्रबंधुओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए , साथ ही आगामी समय पर रतलाम नगर के वरिष्ठ विप्रबंधुओं का सम्मान तथा आर्थिक रूप से कमजोर विप्रबंधुओं को सहयोग हेतु विप्रबंधुओं ने अपने विचार और सहमति प्रदान की ,
इस बैठक में पं.भूपेंद्र जोशी पं.हितेंद्रजोशी पं.नरेश शर्मा पं.कान्हा शर्मा पं.राममिलन शास्त्री पं.मनमोहन शास्त्री पं.नंदकिशोर व्यास पं.महेशानंद शर्मा पं. जितेंद्रनागर (सैलाना )पं.विकास नागर पं.जीवन पाठक पं.मुकेशशर्मा पं.गोपाल मेहता पं.हेमंत शर्मा पं.संजय मिश्रा पं.ओमप्रकाश शर्मा पं.हरीश जी चतुर्वेदी पं.हार्दिक शर्मा पं.सुरेंद्र व्यास ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए इस मौके पर ज्योतिष शिक्षण जनकल्याण समिति क़े पदाधिकारी सहित रतलाम सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के बड़ी संख्या में विप्रबंधु उपस्थित रहे ,