रतलाम । माननीय न्यायालय श्री मयंक मोदी मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी जिला रतलाम द्वारा निर्णय दिनांक 21.03.2023 को अभियुक्त नारायण सिंह पिता भेरू सिंह राजपूत उम 45 साल नि. ग्राम बिलंदपुर पुलिस थाना कालूखेडा जिला रतलाम को आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के अंतर्गत 1 वर्ष का कठिन कारावास एवं 25,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
प्रकरण में पैरवीकर्ता सहायक जिला अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय ने बताया कि थाना कालूखेड़ा, जिला रतलाम पर प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ सरजूदास बैरागी को दिनांक 29.08.2016 को हाजिरी ड्यूटी के दौरान टेलीफोन पर मुखबीर सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम बिलंदपुर के नारायण सिंह अपनी किराने की दुकान पर अवैध लाभ कमाने के लिए 07 पेटी अवैध देशी मदिरा रखे है जो रात में ही विक्रय करने वाला है। उसने सूचना को रोजनामचा सान्हा 20 पर दर्ज कर आरक्षक 904 को पंच तलब करने हेतु भेजा जो पंच नितेश व जितेन्द्र को लेकर थाने वापस आया उसने मौजूद फोर्स व पंच को मुखबीर सूचना से अवगत कराया तथा मुखबीर सूचना पंचनामा बनाया। समय अभाव में तत्काल दविश देना आवश्यक होने से सर्च वारंट न मिल सकने का पंचनामा समक्ष फोर्स के बनाया वह शासकीय वाहन क. एम.पी.03.4405 से चालक सैनिक भोपाल सिंह, फोर्स व पंच के ग्राम बिलंदपुर पहुंचा, जहां एक व्यक्ति किराना दुकान के बाहर खड़ा मिला। उससे नाम व पता पूछने पर नारायण सिंह बताया। दुकान के बारे में पूछने पर स्वयं की दुकान होना बताया। उसने नारायण को मुखबीर सूचना से अवगत कराकर स्वयं फोर्स की नारायण को तलाशी देकर दुकान के अंदर तलाशी लेने की स्वीकृति देने पर पंचनामा बनाया। तलाशी लेने पर दुकान के अंदर सात पेटी पुट्ठे की देशी प्लेन मदिरा से भरी मिली। पेटी को चेक करने पर प्रत्येक पेटी में 50-50 क्वाटर कुल 350 क्वाटर कीमती 15750 रूपये की होना पाया उसने उक्त शराब को रखने का लायसेंस परमिट का पूछने पर नहीं होना बताया। उक्त अपराध धारा 34 (2) आबकारी अधिनिमय का होने से आरोपी के कब्जे से पंच के समक्ष शराब जप्त कर जप्ती पंचनामा बनाया। प्रत्येक पेटी में से दो-दो क्वाटर जांच हेतु निकाले मौके की संपूर्ण कार्यवाही उपरांत जप्तशुदा शराब व आरोपी के थाने वापस आकर शराब एचसीएम के सुपुर्द की व आरोपी को बंद हवालात किया और असल अपराध पंजीबद्ध किया, बाद आवश्यक विवेचना धारा 34 (2) मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के अधीन अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य/तर्क के आधार पर अभियुक्त को दोषसिद्ध किया गया।
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय द्वारा की गई।