सह जोड़ा लोगस्स जाप के साथ तप अनुमोदना सप्ताह का मांगलिक आगाज

नासिक,17 अप्रेल (निलेश कांठेड़) । भीलवाड़ा चातुर्मास सम्पन्न करके मेरठ जाना और फिर वहां से जयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर होते हुए अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर नासिक पहुंचना मिशन इमपॉसिबल लग रहा था लेकिन नासिकवासियों की भक्तिभावना ने इसे मिशन सक्सेस बना दिया। तीन वर्ष बाद पुनः नासिक की पावन धरा पर आगमन हुआ है लेकिन नासिकवासियों के प्रेम में कोई कमी नहीं आई है। जैसा छोड़ गए थे वहीं प्रेम यहां आकर पुनः प्राप्त हो रहा है। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि, वाणी के जादूगर डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने सोमवार को नासिक के आरके स्थानक में मंगलप्रवेश के अवसर पर आयोजित सह जोड़ा लोगस्स जाप एवं धर्मसभा में व्यक्त किए। प्रेरणाकुशल भवान्त मुनिजी म.सा., गायनकुशल जयवंत मुनिजी म.सा. के साथ सुबह जैन स्थानक म्हसरूल से विहार कर आरके स्थानक पहुंचे समकितमुनिजी म.सा. ने नासिकवासियों की भक्ति का स्वयं को दिवाना बताते हुए कहा कि हम तप का फूल नहीं बन सकते तो अनुमोदना की पंखुड़ी जरूर बने। धर्मसभा में पूज्य उप प्रवर्तक श्री प्रमोदमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
लोगस्स जाप के माध्यम से तीर्थंकरों की आराधना
सह जोड़ा लोगस्स जाप के माध्यम से अरिहन्त प्रभु सहित 24 तीर्थंकरों की आराधना करते हुए सर्वमंगल की कामना की गई। समकितमुनिजी ने कहा कि लोगस्स की आराधना सभी प्रकार के संकट हरणे वाली होती है। इससे जाप आराधक सीधे तीर्थंकरों की उर्जा के साथ जुड़ते है। तीर्थंकरों की साधना कभी निष्फल नहीं होती है। कर्म निष्फल हो सकते लेकिन धर्म नहीं। यदि विधि सहित लोगस्स पाठ की आराधना की जाए तो सर्वप्रकार के आनंद का वातावरण बनता है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों की उर्जा भक्त के अंदर इतनी सकारात्मक शक्ति लाती है कि भीतर परिवर्तन होना शुरू हो जाते है। तीर्थंकर देते हुए दिखाई नहीं देते लेकिन फिर भी बहुत कुछ देते है।
एक गलती कर सकती जिंदगी बर्बाद
पूज्य समकितमुनिजी ने कहा कि जिंदगी बर्बाद करने के लिए 100 गलतियां करना जरूरी नहीं है। एक गलती भी जिंदगी बर्बाद कर देती है। जैसे-जैसे सफलता के शिखर पर पहुंचे वैसे ही सावधानी जरूरी है। सजगतापूर्वक आगे बढ़ने से निश्चित सफलता मिलती है। जीवन में सफल होने का मंत्र प्रदान करते हुए आगममर्मज्ञ डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि गलती करना बंद कर दो, गलती हो गई हो तो उसे दोहराना बंद कर दो। गलती होने पर उसे छुपाने की बजाय गुरू के समक्ष प्रकट कर दे।प्रतिक्रमण द्वारा गलती को सुधारना जिनशासन की उज्जवल परम्परा है। प्रवचन के शुरू में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने भी विचार व्यक्त किए। श्रीसंघ के महामंत्री जे.सी. भण्डारी ने कहा कि पूज्य गुरूदेव समकितमुनिजी म.सा. का वर्ष 2019 का स्वर्णिम चातुर्मास की स्मृतियां श्रावक-श्राविकाओं के मन में अब भी ताजा है। पूज्य गुरूदेव की प्रेरक वाणी ने नासिकवासियों को उनका भक्त बना दिया है।
भगवान आदिनाथ की कथा का शुभारंभ मंगलवार से
अक्षय तृतीया पारणा महोत्सव के उपलक्ष्य में जैन श्वेताम्बर स्थानकवासी श्रीसंघ आर के नासिक के तत्वावधान में समकितमुनिजी म.सा. के मुखारबिंद से 18 अप्रेल से भगवान आदिनाथ की कथा का शुभारंभ होगा। कथा का वाचन 23 अप्रेल तक प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक होगा। आदिनाथ भगवान का पारणा श्रेयांश कुमार ने ही क्यों कराया जैसी जिज्ञासाओं का समाधान भी कथा के दौरान होने वाले प्रवचनों में किया जाएगा। वर्षीतप की महान साधना में रत पूज्य समकितमुनिजी के सानिध्य में 23 अप्रेल को अक्षय तृतीया वर्षीतप पारणोत्सव का आयोजन होगा। पूज्य समकितमुनिजी का वर्ष 2023 का चातुर्मास पूना के आदिनाथ जैन स्थानक भवन के लिए घोषित है जहां चातुर्मासिक मंगल प्रवेश 25 जून को होगा।