जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथमल जी महाराज दीक्षाभूमि पर संत सम्मेलन आयोजित

बोलियां जैन मंदिर 25 अप्रैल 2023 । धार्मिक उपासना के आचार पक्ष को लेकर विचारों में टकराव पैदा होता है उससे बड़ा अधर्म और कुछ नहीं हो सकता उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने जैन मंदिर में मिनी संत कुंभ मेलेको संबोधित करते हुए कहा कि धार्मिक कर्मकांड का मुख्य उद्देश्य आचार मे सात्विकता विचार में निर्मलता जीवन में उदारता और व्यवहार में प्रेम और सद्भाव से ओतप्रोत होना और सभी को करना। मुनि कमलेश ने कहा कि अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार कम और ज्यादा साधना होती है उसके आधार पर किसी को नीचा और ऊंचा मानना गौर अज्ञानता हैआचार का संबंध स्वयं की आत्मा से वह भी वीतरागता बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि द्रव्य क्षेत्र और काल के आधार पर संयम की सुरक्षा के लिए किया गया परिवर्तन धर्म का अभिन्न अंग है वहभी वरदान बनता है। राष्ट्रसंत ने कहा कि धर्म सामाजिक समरसता अहिंसा और एकता की शिक्षा प्रदान करता है।
आचार्य प्रवरने कहा कि परस्पर प्रेम वात्सल्य करुणा और सद्भाव का प्राणी मात्र में संचार हो टकराव अलगाव नफरत और फिरका परस्ती को धर्म में कई स्थान नहीं है य हअपने आप में अधर्म पाप और पतन का कारण है।
आचार्य प्रवर वीररत्न सुरिश्वर जी ने कहा कि बाहरी क्रिया से ऊपर उठकर समन्वय प्रेम और एकता मैं जिसका विश्वास नहीं वह धार्मिक तो क्या इंसान भी नहीं है। युवा संत उदय रत्न सागर जी ने कहा कि संप्रदायवाद और क्रियावाद हिंसा और आतंकवाद की जननी है इनकी जंजीरोंसे धर्म देश और विश्व को मुक्त कराना होगा तभी धर्म में प्रवेश होगा।
संत सम्मेलन में दो महावीर जयंती मनाने पर नाराजगी प्रकट की महावीर जयंती और पर्यूषण पर्व एक साथ मनाया जाए अपनी परंपरा का पालन करके दूसरी परंपराका सम्मान करें वाद-विवाद निर्मित हो ऐसा आचरण न करेंऐसा प्रस्ताव पास किया 34साधु साधु सम्मेलन में भाग लिया 26 अप्रैल को भी मूर्ति पूजक और स्थानकवासी संतों का सामूहिक प्रवचन एवं ज्वलंत समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए चर्चा होगी आचार्य श्री के नगर प्रवेश पर मुनि कमलेश ने अभिनंदन किया सभी धर्म जातियों संप्रदाय के लोगों ने स्वागत किया।