
महिदपुर 27 मई 2023 । पशु जिसका अन्न लेता है उस उपकारी की रक्षा के लिए जान लुटा देता है जिससे हमारे ऊपर देव गुरु धर्म का अनंत उपकार रहता है । हमें प्रभु के शासन में रहने का सौभाग्य मिला स्वप्न में भी हमारे द्वारा शासन की तनिक भी असातना हो जाए उससे बड़ा और कोई पाप नहीं हो सकता । एक ही देव गुरु धर्म के उपासक जब आपस में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं कीचड़ उछलते हैं वाद विवाद टकराव करके समाज की दुर्दशा करते हैं और अपने आपको समाज का नेता कहते हैं प्रभु उनको कभी माफ नहीं करता। हमारे द्वारा मन वचन काया से एक भी व्यवहार ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे जिन शासन की अवहेलना हो ।
कुछ समय से देखने में आ रहा है सोशल मीडिया पर महाभारत संग्राम मचा रखा है उसे हाथ में कुछ नहीं आने वाला है यह सब व्यवहार को जब युवा पीढ़ी पड़ती है अजैन लोग देखते हैं पढ़ते हैं तो हंसी उड़ाते हैं यह पूरे शासन की बदनामी है । विचारों में मतभेद हो सकते हैं कार्य शैली में अंतर हो सकता है परंतु उसका समाधान आपस पर जाजम पर बैठकर करें समझे अथवा समझाएं व्यक्तिगत संस्थागत समाज को लेकर संगठन को लेकर आमने-सामने शत्रु की भांति व्यवहार करते हैं, एक ही गुरु के भक्त देखकर अंतरात्मा रो पड़ती है आपको न्याय चाहिए अदालत का रास्ता खुला है लेकिन किसी को नीचा दिखाना साक्षात परमात्मा का अपमान करना है। जैन दिवाकर गुरुदेव के सिद्धांतों का गला घोटना है, आलोचना से कोई समस्या हल नहीं हो सकती है ।आपस में कीचड़ उछालने से वह कीचड़ महापुरुषों के मुंह पर काली मां पोतने जैसा पाप कर रहे हैं। चाहे वह कोई भी संगठन संप्रदाय हो यदि वह आपस में कड़वाहट पैदा करता है तो महा मोहनियकर्म का बंधन करता है ।
विशेषकर मैं अखिल भारतीय जैन दिवाकर संगठन समिति सहित सभी विभिन्न संगठन के सभी पदाधिकारियों एवं गुरु भक्तों से सविनम्र अनुरोध करता हूं वह आपस में उलझ कर दिवाकर की छवि को कलंकित करने का प्रयास न करें तत्काल सोशल मीडिया पर फिजूल की चर्चा को विराम दे । नहीं तो संत समाज खामोश नहीं बैठेगा समाज के घातक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्णय लेना पड़ेगा मैं कितने दिनों से देख रहा हूं काम के नाम पर तो जीरो कोई प्रैक्टिकल काम नहीं सिर्फ बधाई अभिनंदन संवेदना संदेश डालकर चर्चा में बने रहना अपने आप को धोखा देना है ।अपनी शक्ति समय और पैसा समाज के उत्थान में लगाएं अपनी लाइन को लंबी करें और नहीं करने वाले की आलोचना ना करें उनके सामने आदर्श प्रस्तुत करें यह मेरे निजी विचार हैं आप सब के सुझाव अपेक्षित है राग द्वेष की आग को कैसे शांत किया जाए ।गुरु भक्तों में प्रेम सद्भाव कैसे कैसे बड़े, हम सब मिलकर समर्पित भाव से जैन दिवाकर के आदर्श और सिद्धांतों को संगठित होकर जन-जन में पहुंचाने का संकल्प लें यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति और विनय होगा ।