वैचारिक प्रदूषण ही बाहरी प्रदूषण की जननी है- राष्ट्रसंत श्री कमल मुनि कमलेश

उज्जैन (महाकाल मंदिर 5 मई 2023) । बुराई के जहर के बदले अच्छाई का अमृत बांटने वाला अभिशाप के बदले आशीर्वाद देने वाला ही सच्चा शिव भक्त बन सकता है। राष्ट्रसंत श्री कमल मुनि कमलेश महाकाल परिसर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि क्रोध, लोभ, अहंकार, ईर्ष्या, का जहर पीना सभी धर्मों की साधना का मुख्य लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि बाहरी प्रदूषण पर संपूर्ण विश्व का ध्यान केंद्रित है परंतु वैचारिक प्रदूषण से सभी अनभिज्ञ बने हुए हैं जबकि वैचारिक प्रदूषण ही बाहरी प्रदूषण की जननी है। मुनि कमलेश ने बताया कि पर्यावरण हमारा असली प्राणहै इसकी सुरक्षा करना धर्म गुरु और परमात्मा की रक्षा करने के समान है। राष्ट्रसंत ने कहा कि एक तरफ सरकार खुद ही जहरीली गैस के कारखानों प्लास्टिक थैली के निर्माण नदियों में कत्लखाने तक का पानी वह आय जाता है तो पर्यावरण शुद्धि की बात करना सरासर अन्याय है ।
जैन संत ने धर्माचार्य से कहा धार्मिक उपासना पद्धति पर्यावरण शुद्धि को ध्यान में रखकर निर्मित करनी होगी महाकाल समिति ने मुनि कमलेश का अभिनंदन किया पुलिस प्रशासन ने विनम्र भाव से सेवा करते हुए पूरे परिसर का अवलोकन करवाया घनश्याम मुनि अक्षत मुनि कौशल मुनि भी जिज्ञासाओं का समाधान दिया।

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