- चित्तौड़ की बेटी होने के नाता मांगा तप-त्याग रूपी उपहार
- साध्वी जयश्री म.सा. आदि ठाणा 3 का चित्तौड़गढ़ के खातरमहल में भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश

चित्तौड़गढ़, 27 जून। चित्तौड़ की बेटी हूं और आपके शहर में चातुर्मास के लिए आई हूं। बेटी को मांगने का हक होता है और मैं आपसे उपहार में तप त्याग साधना की मांगती हूं। मैं आपकी हूं और आप सभी मेरे है। यह चातुर्मास किसी एक-दो परिवार का नहीं आप सभी का है और हम किसी एक के लिए नहीं आप सभी के लिए यहां आए है। यह किसी एक पंथ का नहीं सभी पंथ का दरबार है। हम सभी को मिलकर इस चातुर्मास को सफल बनाना है। तप साधना में ही चातुर्मास की सार्थकता है। ये विचार चित्तौड़गढ़ के भड़कत्या कुल में जन्म लेने वाली मेवाड़ चन्द्रिका जयश्रीजी म.सा. ने मंगलवार को शहर के खातरमहल में चातुर्मासिक मंगलप्रवेश के अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। जयश्री म.सा., प्रवचनकार राजश्री म.सा. एवं सेवाभावी समीक्षाश्रीजी म.सा. ने सुबह महेशनगर स्थित भड़कत्या निवास से विहार कर खातरमहल में मंगलप्रवेश किया। धर्मसभा में जयश्री म.सा. ने कहा कि हम सभी को चातुर्मास में धर्म प्रभावना करनी है। संयोग से इस बार भी पूर्व के चातुर्मास की तरह ही पांच माह का चातुर्मास होने से अधिक समय धर्म साधना के मिलेगा। उन्होंने कहा कि चित्तौड़वासियों की भक्ति भावना उन्हें अपनी जन्मभूमि पर चातुर्मास के लिए खींच लाई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के चातुर्मास के लिए भी चित्तौड़गढ़ श्रीसंघ ने विनती की थी लेकिन यहां से दूर होने से आना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने भाई महारासा आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी का चातुर्मास कराने का सुझाव दिया था और श्रीसंघ ने उसके अनुरूप विनती कर यह चातुर्मास कराया था जो एतिहासिक रूप से सफल रहा। गौरतलब है कि जयश्री म.सा. के तीन बार पहले भी यहां चातुर्मास हुए है लेकिन उनके सानिध्य में यह प्रथम चातुर्मास हो रहा है। धर्मसभा में प्रवचनकार राजश्रीजी म.सा. ने कहा कि चित्तौड़वासियों ने जिस उत्साह व भक्ति भावना से स्वागत किया है उससे पूरा विश्वास है कि यह चातुर्मास तप-साधना की दृष्टि से एतिहासिक बनेगा। उन्होंने कहा कि महासाध्वी जयश्री म.सा. एवं साध्वी समीक्षाजी म.सा. चित्तौड़ की बेटियां है और उन्हें अपने क्षेत्र में चातुर्मासिक धर्मगंगा प्रवाहित करने का सुअवसर मिला है। स्वागत उद्बोधन स्थानीय श्रीसंघ के अध्यक्ष अशोक मेहता ने दिया। समग्र जैन समाज की प्रतिनिधि संस्था श्री महावीर जैन मण्डल के प्रचार-प्रसार सचिव सुधीर जैन ने चातुर्मास कर रही महासाध्वियों का जीवन परिचय प्रस्तुत किया। धर्मसभा में अखिल भारतीय जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शांतिलालजी मारू, जैन कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा कॉन्फ्रेंस की राजस्थान महिला शाखा अध्यक्ष नीता बाबेल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाड़जी मेहता, जैन दिवाकर संगठन समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष संगीता जारोली, कोयमबटूर के राजेन्द्र तरावत, मालेगांव के बालचंद छाजेड़, कपासन के सूर्यप्रकाश सिरोया, उदयपुर के पवन मेहता, नीमच के राकेश कोठारी, विजय लोढ़ा, निम्बाहेड़ा से आनंद सालेचा, सिद्धार्थ मेहता, सिंगोली के दिलीप जैन, चित्तौड़गढ़ में जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के रूप में अशोक नाहर, हस्तीमल चण्डालिया, वल्लभ बोहरा, चांदमल बोकड़िया, ऋषभ सुराणा, चन्द्रसिंह कोठारी, छोटूलाल सुराणा आदि ने विचार व्यक्त करते हुए चातुर्मासिक सफलता की मंगल कामना की। श्री जैन दिवाकर महिला परिषद अध्यक्ष अंगूरबाला भड़कत्या एवं पदाधिकारी, चंदनबाला महिला मण्डल अध्यक्ष प्रमिला बड़ाला एवं पदाधिकारी, श्री जैन दिवाकर महिला मण्डल अध्यक्ष सेंती की अध्यक्ष सरोज नाहर एवं पदाधिकारी ने मधुर गीतिकाओं से साध्वीवृन्द का स्वागत किया। पूज्य जयश्री म.सा. के सांसारिक कुल भड़कत्या परिवार की महिला सदस्यों ने भी स्वागत गीत की प्रस्तुति दी। संचालन श्रीसंघ के उपाध्यक्ष अजीत नाहर ने किया। आभार श्रीसंघ के मंत्री सुनील बोहरा ने जताया।
मंगलप्रवेश यात्रा में गूंजे जय जैन दिवाकर एवं महासाध्वी जयश्रीजी के जयकारे
सुबह चातुर्मासिक मंगलप्रवेश यात्रा महेशनगर में भड़कत्या निवास से शुरू हुई। मंगलप्रवेश यात्रा में जैन दिवाकर पूज्य श्री चौथमलजी म.सा. के मेवाड़ चन्द्रिका जयश्रीजी म.सा. के जयकारे गूंजते रहे। मंगलप्रवेश यात्रा मीरानगर, शास्त्रीनगर, कलेक्ट्रट चौराहा, सुभाष चौक, नेहरू बाजार, सदर बाजार होते हुए गांधीचौक स्थित खातरमहल पहुंच धर्मसभा में बदल गई। मंगलप्रवेश यात्रा में चित्तौड़वासियों के साथ विभिन्न स्थानों से आए सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए।
हर गुरूवार रहेगा जयश्री म.सा. के मौन
धर्मसभा में साध्वी जयश्री म.सा. ने बताया कि 2 जुलाई से प्रारंभ होने वाले चातुर्मास में दैनिक प्रवचन का समय सुबह 9 से 10 बजे तक रहेगा। प्रत्येक गुरूवार को प्रवचन का आगार रखते हुए उनके मौन साधना रहेगी। चातुर्मास में जप-तप-भक्ति की भावना पर आधारित विभिन्न गतिविधियां होती रहेगी।