तलेगांव में हुआ इतिहास सर्जक भव्यतम चातुर्मासिक मंगल प्रवेशोत्सव

  • सामुहिक सिद्धितप की हुई घोषणा
  • 2 जुलाई से निरंतर प्रवचन प्रारंभ
  • 3 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा

तलेगांव। पूज्य परोपकार सम्राट मोहनखेडा़ तीर्थ विकास प्रेरक आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के आज्ञानुवर्ती शिष्य वरिष्ठ मुनिप्रवर श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा. प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचद्र विजयजी म.सा.मुनिश्री प्रीतियश विजयजी म.सा. आदि ठाणा का मारुति मंदिर चौराहे से सामैया के साथ वाजते गाजते साजन माजन सह भव्यातिभव्य परमपथ चातुर्मासिक मंगल प्रवेश तलेगांव दाभाडे की पावन भूमि पर सानंद सम्पन्न हुआ।
मारुति मंदिर चौराहे पर श्रीमती पंकूबेन हस्तीमलजी व अनीताबेन रविंद्र कुमारजी सोलंकी परिवार ने चांदी के कलशों के द्वारा गंहुली एवं अक्षत वधामना के साथ तीन परिक्रमा देते हुए सामैया किया पश्चात चल समारोह प्रारंभ हुआ जो शहर के मुख्य मार्ग से होता हुआ श्री जीरावाला दादा के दरबार में पहुंचा। दर्शन वंदन के पश्चात् समीप के परमपथ प्रवचन मंडप में धर्मसभा में परिवर्तित हुआ । जहां सकल श्रीसंघ ने सामूहिक गुरु वंदन किया। वरिष्ठ मुनिप्रवर श्री पीयूषचंद्र विजयजी ने मंगलाचरण कर ध्यान करवाया। पधारे अतिथि लाभार्थी एवं संघ प्रमुखों ने देवगुरु चित्र पर धूप दीप माल्यार्पण किया। श्री पीयूषचंद्र विजयजी ने प्रवचन में फरमाया 5 माह तक विरति वर्षावास में निरंतर धर्म की गंगा प्रवाहित होगी जिसमें डुबकी लगाकर सभी को पावन बनना है। तलेगांव श्रीसंघ में त्रिस्तुतिक संतों का प्रथम चातुर्मास हो रहा है जो श्रीसंघ की विशेष उदारता को दर्शाता है। प्रवचन प्रतिक्रमण आराधना गोचरी आदि सभी कार्य समय अनुसार अनुशासन के साथ में किये जाएंगे। श्री जीरावला पार्श्वनाथ दादा को समर्पित सिद्धितप की विराट आराधना का आयोजन होगा। इस मौके पर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने कहा चातुर्मास पर्व 4 संदेश लेकर आता है। पहला चार गति से मुक्त बनो। कौन? सी चार गति है। आज के युवाओं को धन उपवन फैशन मनोरंजन यही चार गति का पता है। A.धन वे धन कमाने के लिए शेयर बाजार-सट्टा बाजार से जुड़ जाते हैं B.उपवन पिकनिक स्पोट फॉरेन ट्रीप नाइट क्लब में जाते हैं C.फैशन मेकअप आर्टिस्ट बनने की होड़ लगाते है D.मनोरंजन T.V.सिनेमा स्पोर्ट्स गेम में समय गंवाते हैं। यही चार गति जानते हैं आज के युवा। धर्माराधना कर संसार भव भ्रमण की चार गतियो से मुक्त बनना है। दुसरा तुरंत धर्माराधना में चुस्त बनो तिसरा मोह माया में सुस्त बनो चौथा समता साधना से संयुक्त बनो।इसी में चातुर्मास की सार्थकता है। जैसे लक्ष्मण रेखा सुरक्षा की गारंटी भाग्य रेखा फायदे की गारंटी वैसे धर्म रेखा सुख की गारंटी है। दृष्टि 2 प्रकार की होती है बाह्य एवं अंतर। चातुर्मास अंतर दृष्टि को खोलने का अनुपम पर्व है।
परमपथ चातुर्मास मंगल प्रवेश के पावन अवसर पर इन महानुभावों को मिला लाभ गुरुपूजन का लाभ श्रीमती इंद्रादेवी भंवरलालजी सुराना (अकुर्डी ),चातुर्मासिक कलश स्थापना श्री हस्तीमलजी बाबूलालजी सोलंकी हस्ते इन्दरभाई, श्री गौतम स्वामीजी की प्रतिमा स्थापना बादामीबाई पुखराजजी संदेश मुथा,श्री राजेंद्रसुरि दादागुरुदेव की प्रतिमा स्थापना जेठमलजी हिराचंदजी सोलंकी हस्ते अजयजी सोलंकी,उतराध्यान सूत्र वेहराने का लाभ हस्तीमलजी बाबूलालजी सोलंकी हस्ते रवीन्द्र भाई,धन्यकुमार चरित्र वोहराने का लाभ संघवी ओटीबेन हीराचंदजी सोलंकी हस्ते भवरभाई,जिरावला दादा की आरती व मंगलदीवो श्री ओटमलजी साकलचंदजी बागरा, गुरुदेव की आरती का लाभ श्री मोहनखेडा गुरुधाम तीर्थ ट्रस्ट मंडल – दहाणू
अतिथियों का बहुमान किया गया। भवरलालजी सुराना धणा निगडी,सुभाषजी कोठारी झाबुआ मध्यप्रदेश त्रिस्तुतिक संघ उपाध्यक्ष,जितेंद्रजी बाबेल झाबुआ,जावंतराजजी भंसाली मुंबई,बाबुलालजी गांधी मुथा सोना ग्रुप,संजयजी वाणीगोता भीनमाल,अशोकजी भंशाली बागोड़ा,मित्तल भाई थराद,प्रवीणजी परमार नाडोल,दिलीपजी पारेख पुणा,प्रकाशजी जैन तखतगढ़,गिरीश भाई मेहता भूति,दिनेशजी नाहर घाणेराव,मुकेशजी रुनवाल झाबुआ,अनिलजी भंडारी बेंगलोर,विनेशभाई ओटरमलजी बागरा,ललीतजी पुनमीया भायंदर,अशोकभाई सातम ग्रुप अध्यक्ष,प्रवीणजी कटारिया महाड़,भरतजी कोठारी भायंदर,मिलापजी जैन पांथेडी,राकेशजी पुनमीया डाहाणु गांव,रंजीत भाई डाहाणु रोड,राकेशजी मेहता झाबुआ,मनोज जी मनोकामना झाबुआ,रमेशभाई ओटरमलजी बागरा,हेमंतजी बाबेल झाबुआ,हितेशभाई मेहता खिमेल,कुमारभाई मुंबई,सचिनजी रांका सादड़ी,किशोरजी हिंगढ पुणे शिवगंज, रंजीतभाई नागोत्रा सोलंकी,प्रकाशजी फुल फगर कामसेट,उत्तमजी लोढा कालीदेवी झाबुआ,शेलेशजी शाह झाबुआ,सुनिलजी राठोड़ झाबुआ,किशोरजी केरिंग पुणा,रमेशजी नागोत्रा सोलंकी आकुर्डी,रमेशजी जोगीलालजी पावा,जयंतीलालजी मेहता आक्रूड़ी,राजूभाई पारेख आकु्डी,शैलेशजी राठोर शिवगंज पुणा,निलेशजी पारेख पुणा,देवेन्द्रजी पारेख पुणा,रोहित जी जैन भायंदर,रंजीतजी पावा भायंदर,अशोकजी रांका धुमडीयां,विमलजी मुथा पुना,मनोजजी खांटेर रोहा,अभिषेक जैन पेण,अनिल भाई सोनीगरा,मलाड मामलदवाड़ी। श्रीसंघ के अध्यक्ष अनिलजी मेहता भंवरजी सोलंकी दिनेशजी जैन प्रकाशजी पोसवाल आदि प्रमुख लोगों ने अतिथियों का बहुमान किया एवं आभार प्रकट किया।