रतलाम,30 जून। सूर्य सालों से प्रकाश दे रहा है और आने वाले लाखों सालों बाद भी ऐसे ही प्रकाश देता रहेगा। सूर्य जैसे सार्वकालिक, सार्वभोमिक और सार्वजनिक है, वैसे ही अच्छाई और सच्चाई भी सार्वकालिक, सार्वभोमिक और सार्वजनिक है। अच्छाई और सच्चाई किसी की धरोहर या विरासत भी नहीं है। ये किसी की बपोती भी नहीं है।
यह बात सिलावटों का वास स्थित नवकार भवन में प्रवचन देते हुए परम पूज्य प्रज्ञा निधि युगपुरूष आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कही। उन्होंने प्रभु कृपा का पात्र बनने का आव्हान करते हुए कहा कि अच्छाई हमेशा बुराई और सच्चाई के बीच सेतु होती है। अच्छाई के सेतु से जो भी निकलता है, उसका जीवन प्रकाशवान हो जाता है। संसार में कभी किसी को अच्छाई का अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि यही बुराई का मूल होता है। वर्तमान में जितनी भी बुराई है, वह अहंकार के कारण ही है।
आचार्य श्री ने कहा कि सच्चाई के बिना व्यक्ति विनम्र नहीं बन सकता। सच्चाई ऐसा मार्ग है, जिस पर चलकर प्रत्येक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मैं ही सच्चा और अच्छा हूं, ये अहम होता है, इसलिए उससे सबकों बचना चाहिए। संसार में अहंकार को नियंत्रित करे बिना कोई आगे नहीं बढ सकता। अहंकार किसी को भी हो सकता है, इसलिए सदैव सतर्क रहना चाहिए। आचार्यश्री ने बताया कि उनका चातुर्मास का विषय सन्मति से सदगति की ओर रहेगा। क्योंकि सदगति का आधार सन्मति होती है।
आरंभ में विद्वान श्री धेर्यमुनिजी मसा ने धर्म की महत्ता बताई। उन्होंने 1 जुलाई से तेले और बेले की तपस्या करने आव्हान करते हुए कहा कि चातुर्मास 2 जुलाई से आरंभ होगा। 3 जुलाई को गुरूपूर्णिमा रहेगी। इसलिए अधिक से अधिक तप-आराधना कर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे। कई श्रावक-श्राविकाआंे ने इस मौके पर तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। संचालन दिव्यांशु मूणत ने किया। श्री हुक्मगच्छीय साधुमार्गी शान्त क्रांति जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष मोहनलाल पिरोदिया एवं सचिव दिलीप मूणत ने बताया कि 1 जुलाई को आचार्यश्री के प्रवचन नवकार भवन सिलावटों का वास में होंगे। 2 जुलाई से समता शीतल पैलेस छोटू भाई की बगीची में प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।